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World Cancer Day: बदल गए कैंसर के इलाज के नियम! जानें सरकार का पूरा प्लान।

आज जब पूरी दुनिया वर्ल्ड कैंसर डे (World Cancer Day) मना रही है, उसी दिन भारत सरकार ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ जंग में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे आने वाले वर्षों में मील का पत्थर माना जाएगा। केंद्र सरकार ने पहली बार देश के लिए ‘नेशनल स्वदेशी गाइडलाइन’ (National Indigenous Guidelines) जारी की है।

यह सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं है, बल्कि उन करोड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की नई रोशनी है, जिनके लिए कैंसर का नाम सुनते ही इलाज का डर, खर्च का बोझ और असहायता सामने आ जाती थी।

सरकार का साफ संदेश है—
अब कैंसर का इलाज सिर्फ बड़े शहरों और महंगे अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा।

कैंसर और भारत: एक डरावनी हकीकत

भारत में हर साल लाखों नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों से आती है। सच्चाई यह है कि:

  • कई मरीज महंगे इलाज के डर से जांच ही नहीं कराते
  • गांवों में सही समय पर पहचान नहीं हो पाती
  • विदेशी दवाओं और प्रोटोकॉल के कारण इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाता है

इसी खाई को पाटने के लिए सरकार ने अब इलाज की दिशा ही बदल दी है।

क्या है ‘स्वदेशी गाइडलाइन’ और क्यों है यह इतनी अहम?

अब तक भारत में कैंसर के इलाज के लिए ज्यादातर पश्चिमी देशों की गाइडलाइन अपनाई जाती थीं। ये गाइडलाइन वहां के खान-पान, जीवनशैली और जेनेटिक प्रोफाइल के हिसाब से बनी थीं।

लेकिन भारत की सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

नई स्वदेशी गाइडलाइन को भारतीय डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और रिसर्च संस्थानों ने मिलकर तैयार किया है। इसका फोकस है—
भारतीय शरीर, भारतीय परिस्थितियां और भारतीय जेब।

स्वदेशी गाइडलाइन की बड़ी बातें

इलाज होगा सस्ता
विदेशी दवाओं की जगह भारतीय जेनेरिक और स्वदेशी दवाओं को प्राथमिकता मिलेगी। इससे इलाज का खर्च 40 से 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

भारतीय जेनेटिक्स पर आधारित इलाज
भारतीयों के खान-पान, पर्यावरण और जीवनशैली को ध्यान में रखकर इलाज तय किया जाएगा।

पूरे देश में एक जैसा इलाज
अब दिल्ली के किसी बड़े कैंसर अस्पताल और किसी दूर-दराज गांव के स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की प्रक्रिया में फर्क नहीं होगा।

गांव तक कैसे पहुंचेगा कैंसर का इलाज?

सरकार जानती है कि सिर्फ गाइडलाइन बना देना काफी नहीं है। असली चुनौती है—इसे जमीन पर उतारना।
इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन के तहत एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।

1. डिजिटल स्क्रीनिंग की शुरुआत

अब गांवों के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में आधुनिक डिजिटल मशीनों से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी।
इसका मतलब—
बीमारी को स्टेज 1 में ही पकड़ने की कोशिश।

2. टेली-ऑन्कोलॉजी की सुविधा

गांव के डॉक्टर अब वीडियो कॉल के जरिए देश के बड़े कैंसर विशेषज्ञों से सीधे जुड़ सकेंगे।
मरीज को सिर्फ सलाह के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा।

3. दवाएं अब पास में

जन औषधि केंद्रों के जरिए कैंसर की जरूरी दवाएं जिला और तहसील स्तर तक उपलब्ध कराई जाएंगी।
अब मरीज को दवा के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

स्वदेशी रिसर्च को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ल्ड कैंसर डे पर यह भी साफ किया कि सरकार सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती।
भारत अब कैंसर रिसर्च में भी आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रहा है।

₹5,000 करोड़ का बड़ा ऐलान

‘बायोफार्मा शक्ति मिशन’ के तहत:

  • स्वदेशी कैंसर वैक्सीन
  • नई इम्यूनोथेरेपी
  • एडवांस बायोलॉजिकल रिसर्च

के लिए ₹5,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट तय किया गया है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत सिर्फ इलाज कराने वाला देश नहीं, बल्कि कैंसर ट्रीटमेंट का ग्लोबल हब बने।

इलाज से पहले बचाव: नई सोच

नई स्वदेशी गाइडलाइन में सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि प्रिवेंशन यानी बचाव को सबसे ऊपर रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अगर कैंसर पहले चरण में पकड़ लिया जाए
  • तो कई मामलों में यह पूरी तरह ठीक हो सकता है

इसी वजह से अब देशभर में:

  • मुफ्त स्क्रीनिंग कैंप
  • महिलाओं के लिए विशेष जांच
  • तंबाकू और लाइफस्टाइल से जुड़े कैंसर पर जागरूकता

को प्राथमिकता दी जाएगी।

डॉक्टर और विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

देश के कई वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट इस पहल को गेम-चेंजर बता रहे हैं।
उनका कहना है कि अब इलाज मरीज के शरीर के मुताबिक तय होगा, न कि सिर्फ विदेशी रिसर्च के आधार पर।

साथ ही, यह कदम मेडिकल खर्च के कारण इलाज छोड़ने वाले मरीजों की संख्या को भी कम करेगा।

आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?

भारत में आज भी कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि आर्थिक तबाही बन जाता है।
कई परिवार जमीन, गहने और जमा पूंजी बेचकर इलाज कराते हैं।

स्वदेशी गाइडलाइन:

  • इलाज को सुलभ बनाएगी
  • गांव और शहर के बीच की खाई कम करेगी
  • गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देगी

निष्कर्ष: कैंसर मुक्त भारत की ओर एक मजबूत कदम

वर्ल्ड कैंसर डे पर लिया गया यह फैसला सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है।
विदेशी प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर भारत ने पहली बार अपने लोगों के लिए, अपने तरीके से लड़ाई शुरू की है।

यह पहल उन लाखों मरीजों के लिए उम्मीद है,
जिनके लिए अब तक कैंसर का मतलब था—डर, खर्च और बेबसी।

मदद के लिए संपर्क करें

राष्ट्रीय कैंसर हेल्पलाइन नंबर:
1800-11-6666