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WEF 2026 : क्या दावोस से आ सकता है भारत में अरबों का निवेश?

आज सोमवार, 19 जनवरी 2026 से स्विट्ज़रलैंड के बर्फीले शहर दावोस में दुनिया की सबसे ताकतवर आर्थिक बैठक—56वां विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF)—शुरू हो गया है। अगले 5 दिनों तक यहां ग्लोबल पावर, पॉलिटिक्स और पैसा एक ही मंच पर नज़र आएगा। लेकिन इस बार हर चर्चा के केंद्र में एक ही सवाल है—क्या दावोस से भारत में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी निवेश (FDI) आएगा?

‘इंडिया मोमेंट’ पर टिकी पूरी दुनिया की नजर

वैश्विक मंदी, युद्ध जैसे हालात और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत को आज एक स्टेबल और भरोसेमंद ग्रोथ स्टोरी के रूप में देखा जा रहा है। WEF 2026 में भारत को लेकर तीन बड़े मुद्दों पर खास फोकस रहने वाला है—

  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: UPI, डिजिटल पेमेंट और टेक्नोलॉजी में भारत की तेज़ रफ्तार
  • ग्रीन एनर्जी: सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की बड़ी योजनाएं
  • मैन्युफैक्चरिंग हब: ‘China Plus One’ रणनीति में भारत की मजबूत दावेदारी

विशेषज्ञ मानते हैं कि यही तीन ताकतें भारत को निवेशकों की पहली पसंद बना रही हैं।

अरबों डॉलर के करार की उम्मीद, दिग्गज मैदान में

दावोस पहुंचे भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री, नीति-निर्माता और रिलायंस, टाटा, अडाणी जैसे बड़े कॉर्पोरेट लीडर्स शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि—

  • Semiconductor और AI सेक्टर में भारत बड़े ग्लोबल प्लेयर्स के साथ समझौते कर सकता है
  • Green Energy Projects पर विदेशी निवेशकों से अहम बातचीत हो सकती है
  • रोजगार का बूम: अगर ये डील्स पक्की होती हैं, तो भारत में टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नई नौकरियों के रास्ते खुल सकते हैं

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक महंगाई और जियोपॉलिटिकल रिस्क जैसे मुद्दे निवेशकों को सतर्क कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भारत की मजबूत GDP ग्रोथ, बड़ा उपभोक्ता बाजार और पॉलिसी स्टेबिलिटी उसे बाकी देशों से अलग खड़ा करती है।

आगे क्या?

अगले पांच दिनों तक दावोस के ‘India House’ में लगातार हाई-लेवल मीटिंग्स होंगी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि WEF 2026 भारत के लिए सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने अपनी आर्थिक ताकत दिखाने और बड़े निवेश को ज़मीन पर उतारने का सुनहरा मौका है।