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तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में सड़कों पर उग्र प्रदर्शन, ‘शाह ज़िंदाबाद’ के नारे भी लगे

ईरान में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत देश के कई बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए, जहां उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। इन प्रदर्शनों की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने खुलेआम “शाह ज़िंदाबाद” के नारे लगाए, जो ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

सड़कों पर क्यों भड़का गुस्सा?

मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन की वजहें कई हैं—

  • बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी
  • आर्थिक प्रतिबंधों से बिगड़ती आम जनता की हालत
  • राजनीतिक आज़ादी और मानवाधिकारों को लेकर नाराज़गी

लोगों का कहना है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी लगातार मुश्किल होती जा रही है और सरकार उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है।

‘शाह ज़िंदाबाद’ के नारे क्यों अहम हैं?

ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद शाह का शासन खत्म हो गया था। ऐसे में सड़कों पर “शाह ज़िंदाबाद” जैसे नारे लगना यह दिखाता है कि एक वर्ग मौजूदा व्यवस्था से कितना असंतुष्ट है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नारेबाज़ी नहीं, बल्कि राजनीतिक असहमति का खुला इज़हार है।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त

प्रदर्शन बढ़ने के बाद:

  • कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई
  • कुछ जगहों पर इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं
  • सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक बयान सीमित रखा गया है

हालांकि, हालात पर नज़र बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें

ईरान में हो रहे इन प्रदर्शनों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी करीबी नजर रखे हुए है। पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों की ओर से स्थिति पर चिंता जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अगर हालात और बिगड़े, तो इसका असर ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये प्रदर्शन किस दिशा में जाएंगे। लेकिन जिस तरह से नारे और गुस्सा सामने आ रहा है, उससे यह संकेत ज़रूर मिलता है कि ईरान के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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