क्या मोदी सरकार के बजट के बाद RBI देगा आपको बड़ा तोहफा? रहे तैयार!
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की चालू वित्त वर्ष की आखिरी बैठक के नतीजों ने आम लोगों से लेकर निवेशकों तक, सभी की नजरें अपनी ओर खींच ली हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का सर्वसम्मत फैसला किया।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश की अर्थव्यवस्था एक ओर तेज़ विकास दर के संकेत दे रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। RBI का यह कदम साफ इशारा करता है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक जल्दबाज़ी में कोई बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहता।
क्यों अहम है यह फैसला?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक आम ग्राहकों को होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसी सुविधाओं पर ब्याज तय करते हैं। ऐसे में रेपो रेट में कोई भी बदलाव सीधे-सीधे आम आदमी की जेब से जुड़ जाता है।
इस बार दरों में बदलाव न होने से एक तरह से RBI ने स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
आपकी EMI पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट स्थिर रहने का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो पहले से लोन चुका रहे हैं या नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं।
EMI फिलहाल नहीं होगी सस्ती
होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तुरंत किसी राहत की उम्मीद नहीं है। जो लोग ब्याज दरों में कटौती का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना पड़ सकता है।
पिछली कटौती का फायदा धीरे-धीरे
हालांकि राहत की एक अच्छी खबर भी है। साल 2025 के दौरान RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। बैंक उस कटौती का फायदा धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। जिनका लोन फ्लोटिंग रेट से जुड़ा है, उन्हें आने वाले महीनों में कुछ राहत महसूस हो सकती है।
FD निवेशकों के लिए राहत की बात
रेपो रेट में स्थिरता का असर सिर्फ कर्जदारों पर ही नहीं, बल्कि निवेशकों पर भी पड़ता है।
FD ब्याज दरों में बड़े बदलाव की संभावना कम
फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने वालों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। ब्याज दरों में अचानक कटौती या बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल कम है, जिससे निवेशकों को स्थिर रिटर्न मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षित निवेश पसंद करने वालों के लिए यह स्थिति अनुकूल बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था पर RBI का भरोसा
मौद्रिक नीति के साथ-साथ RBI ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर जो अनुमान पेश किए हैं, वे काफी सकारात्मक संकेत देते हैं।
GDP ग्रोथ अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान जताया है। यह दर दिखाती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है।
महंगाई को लेकर सतर्क नजर
जहां विकास दर पर RBI आशावादी दिख रहा है, वहीं महंगाई को लेकर उसने सतर्क रुख अपनाया है।
रिकॉर्ड निचला स्तर
अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई दर 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जो हाल के वर्षों में एक बड़ी उपलब्धि मानी गई।
आने वाले समय का अनुमान
हालांकि RBI ने चेताया है कि आगे की तिमाहियों में महंगाई कुछ बढ़ सकती है। FY27 की पहली छमाही के लिए महंगाई दर 4% से 4.2% के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।
यह संकेत देता है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन RBI किसी भी संभावित दबाव को हल्के में नहीं लेना चाहता।
नया डेटा सीरीज: क्या बदलेगी तस्वीर?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के बाद एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि GDP और महंगाई के लिए नई सांख्यिकीय श्रृंखला (New Data Series) अगले दो दिनों में जारी की जाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नई सीरीज से आर्थिक आंकड़ों को और अधिक सटीक तरीके से मापा जा सकेगा। इससे नीति निर्माण में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
वैश्विक हालात और RBI का फैसला
RBI का यह निर्णय केवल घरेलू आंकड़ों पर आधारित नहीं है, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर लिया गया है।
बजट 2026-27 और भारत-अमेरिका समझौता
हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026-27 और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने अर्थव्यवस्था को सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18% करना निर्यात के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है।
इसके बावजूद RBI ने जल्दबाज़ी न करते हुए ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा है।
वैश्विक अनिश्चितताएं अभी बाकी
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में RBI का सतर्क रवैया समझा जा सकता है।
