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पीएम मोदी और मलेशियाई पीएम के बीच हुई इन 8 अहम मुद्दों पर बात, जानिए भारत को क्या मिला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा ने भारत की विदेश नीति में एक और मजबूत अध्याय जोड़ दिया है। राजधानी कुआलालंपुर में मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत-मलेशिया रिश्तों की दिशा तय करने वाला क्षण साबित हुई। बैठक के बाद जारी साझा बयान ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब केवल पारंपरिक दोस्ती तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रहा प्रधानमंत्री मोदी का दिया गया ‘IMPACT’ मंत्र, जिसे उन्होंने भारत-मलेशिया संबंधों का भविष्य बताया। IMPACT यानी India-Malaysia Partnership for Advancing Collective Transformation—एक ऐसा ढांचा जो दोनों देशों को व्यापार, रक्षा, तकनीक और लोगों से लोगों के रिश्तों के स्तर पर और करीब लाएगा। यह मंत्र सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक स्पष्ट विज़न है, जो बदलती वैश्विक राजनीति और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

क्यों अहम है मोदी-अनवर मुलाकात?

भारत और मलेशिया के रिश्ते दशकों पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। चीन का बढ़ता प्रभाव, सप्लाई चेन की अनिश्चितता, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां—इन सबके बीच भारत और मलेशिया का और करीब आना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि इस बैठक को सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

‘IMPACT’ फ्रेमवर्क: रिश्तों की नई बुनियाद

प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान ‘IMPACT’ फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा, जिसे दोनों नेताओं ने खुले दिल से स्वीकार किया। यह फ्रेमवर्क रक्षा, व्यापार, तकनीक, स्टार्टअप, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को एक संरचित रूप देगा। इससे पहले सहयोग कई स्तरों पर था, लेकिन अब इसे एक साझा लक्ष्य और रोडमैप के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, IMPACT भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह दक्षिण-पूर्व एशिया में भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।

मलेशिया में UPI: भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को राहत

इस यात्रा का एक ठोस और आम लोगों से जुड़ा फैसला रहा मलेशिया में UPI लॉन्च करने पर सहमति। जैसे ही यह सुविधा शुरू होगी, मलेशिया जाने वाले भारतीय पर्यटकों को कैश या विदेशी कार्ड की झंझट से छुटकारा मिलेगा। वहीं भारतीय व्यापारी और स्टूडेंट्स भी सीधे अपने भारतीय बैंक खातों से भुगतान कर सकेंगे।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यह भारत की सॉफ्ट पावर को और मजबूत करेगा। पहले सिंगापुर और कुछ अन्य देशों में UPI की सफलता के बाद अब मलेशिया में इसका विस्तार एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कोटा किनाबालु में नया भारतीय दूतावास

प्रधानमंत्री मोदी ने कोटा किनाबालु में भारत का नया वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा भी की। यह फैसला मलेशिया में बढ़ते भारतीय निवेश, पर्यटन और प्रवासी समुदाय की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है। इससे न केवल वीज़ा और कांसुलर सेवाएं आसान होंगी, बल्कि व्यापारिक संपर्क भी मजबूत होंगे।

सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी में बड़ी साझेदारी

तकनीक के क्षेत्र में भारत और मलेशिया के बीच सहयोग इस यात्रा का एक और अहम पहलू रहा। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, फिनटेक और साइबर सुरक्षा से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मौजूदा दौर में जब दुनिया सेमीकंडक्टर की कमी और सप्लाई चेन संकट से जूझ रही है, तब यह सहयोग भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

मलेशिया पहले से ही सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में एक अहम भूमिका निभाता है, जबकि भारत इस क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रहा है। दोनों की साझेदारी एशिया में एक मजबूत टेक इकोसिस्टम बना सकती है।

रक्षा सहयोग: ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

रक्षा क्षेत्र में भी इस बैठक के दौरान बड़ा संकेत मिला। मलेशिया ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने भारतीय रक्षा उपकरणों में गहरी रुचि दिखाई है। साझा बयान के अनुसार, दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उत्पादन और ट्रेनिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे।

यह भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और मलेशिया के लिए भी लागत-प्रभावी और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकता है।

शांति का संदेश: यूक्रेन और गाजा पर भारत की भूमिका

वार्ता के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने यूक्रेन और गाजा संकट में शांति के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने भारत को एक संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताते हुए पीएम मोदी को “दुनिया का शांति दूत” कहा। यह बयान भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख को दर्शाता है।

व्यापार और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन

दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को रुपये और रिंगिट जैसी स्थानीय मुद्राओं में करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसका मकसद डॉलर पर निर्भरता कम करना और व्यापार को ज्यादा स्थिर और सस्ता बनाना है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो भारत-मलेशिया व्यापार को नई रफ्तार मिल सकती है।

भारतीय प्रवासियों को भरोसा

प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय की भूमिका और योगदान की सराहना की। मलेशियाई सरकार ने भी भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। यह संदेश न सिर्फ प्रवासी भारतीयों के लिए भरोसे का संकेत है, बल्कि दोनों देशों के सामाजिक रिश्तों को भी मजबूत करता है।

भारत को क्या मिला इस यात्रा से?

इस यात्रा से भारत को ASEAN क्षेत्र में एक और मजबूत रणनीतिक साझेदार मिला है। UPI का विस्तार भारत की डिजिटल पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा। सेमीकंडक्टर और रक्षा सहयोग भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लक्ष्य के और करीब लाएगा। वहीं, दक्षिण चीन सागर के पास स्थित मलेशिया के साथ मजबूत संबंध चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक बढ़त माने जा रहे हैं।

निष्कर्ष: रिश्तों में नई ऊर्जा

प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा सिर्फ एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति का स्पष्ट संकेत है। IMPACT फ्रेमवर्क, UPI विस्तार, टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग—ये सभी कदम बताते हैं कि भारत और मलेशिया अब पुराने रिश्तों को नए संदर्भ में देख रहे हैं। अगर इन समझौतों को जमीन पर सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत-मलेशिया साझेदारी एशिया की सबसे मजबूत द्विपक्षीय साझेदारियों में गिनी जा सकती है।