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साल के अंत में बाजार पर दबाव: 26000 के नीचे निफ्टी, निवेशकों की चिंता बढ़ी

साल के आखिरी कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 एक बार फिर 26000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। कमजोर ग्लोबल संकेतों और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली के चलते बाजार में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है।

🔻 बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

1. ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत

अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में उतार-चढ़ाव, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका ने भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflow)

साल के अंत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा मुनाफावसूली और पूंजी निकासी से बाजार पर दबाव बना। खासतौर पर बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली देखी गई।

3. साल के अंत की मुनाफावसूली

पूरे साल की तेजी के बाद कई निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए मुनाफा बुक किया, जिससे इंडेक्स पर नेगेटिव असर पड़ा।

4. बड़े शेयरों में कमजोरी

आईटी, मेटल और बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में गिरावट ने निफ्टी को नीचे खींचा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव बना रहा।

5. आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार

महंगाई, ब्याज दर और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों को लेकर निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

📊 अब आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, 26000 का स्तर निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है।

  • अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में दोबारा रिकवरी देखने को मिल सकती है
  • वहीं, नीचे की ओर 25800–25500 के स्तर पर अगला मजबूत सपोर्ट नजर आ रहा है

💡 निवेशकों के लिए सलाह

  • शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह
  • लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अच्छी कंपनियों में गिरावट पर खरीदारी का मौका
  • सेक्टर रोटेशन और स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच अपनाना बेहतर रहेगा