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‘कोरियन लवर’ गेम का खौफनाक सच: क्या वर्चुअल दुनिया ले सकती है किसी की जान?

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई यह खबर सिर्फ एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि एक ऐसा हादसा है जिसने हर माता-पिता, हर परिवार और पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। लोनी इलाके की भारत सिटी सोसाइटी (Bharat City Society) में बुधवार तड़के जो हुआ, उसने लोगों की नींद और चैन दोनों छीन लिए।

करीब रात 2:00 से 2:30 बजे के बीच, एक ही परिवार की तीन सगी बहनें—निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12)—अपनी सोसाइटी की 9वीं मंज़िल से नीचे कूद गईं। कुछ ही पलों में एक घर, जो कुछ घंटे पहले तक सामान्य था, मातम में बदल गया।

खामोश रात और अचानक मची चीख-पुकार

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात बिल्कुल शांत थी। ज्यादातर फ्लैट्स में लोग सो रहे थे। तभी अचानक नीचे तेज आवाज आई। पहले किसी को समझ नहीं आया कि हुआ क्या है। जब लोग बालकनियों और खिड़कियों से झांकने लगे, तो नीचे का मंजर देखकर सिहर उठे।

तीनों बच्चियों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ ही मिनटों में पूरी सोसाइटी में पुलिस, एंबुलेंस और भीड़ जमा हो गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि एक साथ तीन मासूम जिंदगियां खत्म हो गईं।

9वीं मंज़िल पर क्या हुआ था?

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, तीनों बहनें अपने कमरे में थीं। कमरे में एक छोटा सा मंदिर भी बना हुआ था, जहां वे अक्सर पूजा करती थीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने खिड़की के पास कुर्सी रखी और फिर एक-एक करके नीचे छलांग लगा दी।

पुलिस के लिए यह मामला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि तीनों ने एक ही समय, एक ही जगह और एक ही तरीके से यह कदम उठाया। सवाल यह नहीं है कि उन्होंने ऐसा कैसे किया—सवाल यह है कि क्यों किया?

‘कोरियन लवर’ गेम: एक नाम, कई सवाल

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक नाम बार-बार सामने आने लगा—‘कोरियन लवर’ (Korean Lover)।

परिजनों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, तीनों बहनें पिछले कुछ सालों से एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम खेल रही थीं। यह आदत कोरोना काल के दौरान शुरू हुई थी, जब स्कूल बंद थे और बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल पर रहते थे।

परिवार वालों का कहना है कि:

  • तीनों घंटों मोबाइल में डूबी रहती थीं
  • पढ़ाई से धीरे-धीरे दूरी बनती चली गई
  • स्कूल जाना लगभग बंद हो गया था

शुरुआत में इसे सामान्य ऑनलाइन गेमिंग माना गया, लेकिन वक्त के साथ यह लत बनती चली गई।

जब माता-पिता ने टोका

घटना से कुछ दिन पहले पिता ने मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर बच्चियों को डांटा था। परिवार का कहना है कि उन्होंने गेम खेलने से मना किया और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा।

यहीं से कहानी का सबसे संवेदनशील पहलू सामने आता है। पुलिस को शक है कि या तो:

  • गेम से जुड़े किसी खतरनाक टास्क का दबाव था
  • या फिर मोबाइल छीने जाने और डांट से बच्चियां मानसिक दबाव में आ गईं

हालांकि, पुलिस साफ कह रही है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।

‘मम्मी-पापा, सॉरी…’ और टूटा हुआ दिल

जांच के दौरान पुलिस को कमरे से कुछ कागजात और एक सुसाइड नोट भी मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसमें सिर्फ कुछ शब्द लिखे थे—
“Mummy-Papa, sorry…”

ये दो शब्द पूरे मामले को और ज्यादा दर्दनाक बना देते हैं। यह कोई गुस्से या बदले का कदम नहीं लगता, बल्कि भीतर चल रहे किसी गहरे मानसिक संघर्ष की ओर इशारा करता है।

पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अब यही फोन बताएंगे कि ‘कोरियन लवर’ गेम में ऐसा क्या था, जिसने बच्चियों को इस हद तक धकेल दिया।

क्या ऑनलाइन गेमिंग सच में इतना खतरनाक है?

इस घटना के बाद विशेषज्ञों की राय भी सामने आ रही है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ टास्क-बेस्ड और इमोशनल मैनिपुलेशन वाले गेम बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं।

  • बच्चे गेम और हकीकत का फर्क भूलने लगते हैं
  • टास्क पूरा करने का दबाव डर और अपराधबोध पैदा करता है
  • कम उम्र में भावनात्मक निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हर ऑनलाइन गेम खतरनाक नहीं होता, लेकिन निगरानी के बिना दी गई आज़ादी बच्चों के लिए जोखिम बन सकती है।

सोसाइटी में मातम, सवालों में डूबा सिस्टम

भारत सिटी सोसाइटी में आज भी सन्नाटा है। जिन फ्लैट्स से बच्चों की हंसी की आवाज़ आती थी, वहां अब ताले और सन्नाटा है। पड़ोसी यही पूछ रहे हैं—क्या हम कुछ देख नहीं पाए? क्या किसी ने समय रहते संकेत नहीं पहचाने?

यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि:

  • डिजिटल लत
  • बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य
  • और माता-पिता की असहायता

इन सभी सवालों को सामने लाता है।

पुलिस की अपील और आगे की जांच

गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि:

  • जांच हर एंगल से की जा रही है
  • किसी भी ऐप या गेम को सीधे दोषी ठहराने से पहले सबूत जुटाए जाएंगे
  • अगर किसी तरह का साइबर क्राइम या उकसावा सामने आता है, तो सख्त कार्रवाई होगी

साथ ही, पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और उनसे खुलकर बातचीत करें।

एक दर्दनाक सबक

गाजियाबाद की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आज के दौर में बच्चों की दुनिया सिर्फ स्कूल और घर तक सीमित नहीं है। मोबाइल की स्क्रीन के पीछे एक पूरी अलग दुनिया है—जिसे समझना, देखना और समय पर संभालना बेहद जरूरी है।

तीन बहनों की यह कहानी किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि चेतावनी देने के लिए है—कि अगर समय रहते नहीं संभले, तो नुकसान अपूरणीय हो सकता है।