कौन बनेगा अगला करोड़पति? AI समिट की इन 5 बातों में छिपा है भविष्य का सबसे बड़ा बिज़नेस आइडिया!
दिल्ली की हल्की ठंड और सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच सोमवार सुबह जब भारत मंडपम के दरवाज़े खुले, तो साफ महसूस हो रहा था कि यह कोई साधारण कॉन्फ्रेंस नहीं है। लॉबी में स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक, विदेशी प्रतिनिधि और कॉलेज के छात्र—सब एक ही सवाल लेकर पहुंचे थे: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सच में भारत की अगली बड़ी आर्थिक छलांग बनेगा?
‘India AI Impact Summit 2026’ की शुरुआत औपचारिक रोशनी और भाषणों से जरूर हुई, लेकिन असली हलचल मंच के पीछे, कॉफी टेबल्स के आसपास और नेटवर्किंग जोन में दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन भाषण में कहा कि आने वाला दशक “AI का दशक” होगा। उनका लहजा सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि आर्थिक था। उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत केवल AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनना चाहता है।
लेकिन इस समिट की कहानी केवल बड़ी घोषणाओं तक सीमित नहीं है। अगर आप एक युवा उद्यमी हैं, निवेश की तलाश में हैं या नया स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे हैं, तो यहां से निकली कुछ बातें आपके लिए दिशा तय कर सकती हैं。
1. ‘Sovereign AI’ और डेटा लोकलाइजेशन: नया डिजिटल सोना
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में डेटा संप्रभुता पर विशेष जोर दिया। उनका संदेश स्पष्ट था—भारत का डेटा भारत में ही सुरक्षित रहेगा। पहली नज़र में यह नीति का विषय लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बड़ा कारोबारी अवसर छिपा है।
इसका मतलब है कि लोकल डेटा सेंटर, क्लाउड स्टोरेज, और भारतीय भाषाओं पर आधारित AI मॉडल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। अभी तक ज्यादातर AI टूल्स अंग्रेज़ी केंद्रित रहे हैं। लेकिन भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का बड़ा हिस्सा हिंदी, तमिल, बंगाली, मराठी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री चाहता है。
एक युवा डेवलपर ने समिट के दौरान कहा, “अगर हम भारतीय भाषाओं के लिए मजबूत AI मॉडल बना लें, तो बाजार हमारे सामने खुला है।” यह बात यूं ही नहीं कही गई। ई-कॉमर्स, कस्टमर सपोर्ट, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं में क्षेत्रीय भाषा आधारित AI समाधान की जरूरत बढ़ रही है। जो स्टार्टअप इस क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाएंगे, उनके लिए आने वाले साल सुनहरे हो सकते हैं。
2. स्वास्थ्य सेवा में AI: गांव तक पहुंचेगी स्मार्ट जांच
समिट में हेल्थकेयर सेक्टर पर हुई चर्चा ने खास ध्यान खींचा। मंच पर मौजूद टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि AI आधारित अर्ली डायग्नोसिस सिस्टम अगले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर लागू हो सकते हैं।
कल्पना कीजिए, एक ग्रामीण क्षेत्र में बैठा व्यक्ति मोबाइल फोन से अपनी प्राथमिक जांच करा सके, और AI उसकी रिपोर्ट का विश्लेषण कर डॉक्टर को संकेत दे दे। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लग सकेगा।
भारत जैसे देश में जहां डॉक्टर-रोगी अनुपात अभी भी चुनौती है, वहां टेलीमेडिसिन और AI आधारित हेल्थ प्लेटफॉर्म गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। सस्ती जांच, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाले स्टार्टअप्स निवेशकों की नजर में तेजी से ऊपर आ रहे हैं。
3. कृषि में तकनीकी बदलाव: ‘Precision Farming’ की दस्तक
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका अब भी अहम है। समिट में ‘Precision Farming’ पर हुई चर्चा ने साफ कर दिया कि खेती अब केवल परंपरागत अनुभव पर निर्भर नहीं रहेगी।
ड्रोन के जरिए खेतों की निगरानी, AI आधारित मिट्टी विश्लेषण और मौसम की सटीक भविष्यवाणी—ये सब अब केवल प्रयोग नहीं, बल्कि व्यावसायिक अवसर बन चुके हैं। सरकार भी इन क्षेत्रों में सब्सिडी और प्रोत्साहन दे रही है।
एक एग्री-टेक स्टार्टअप के संस्थापक ने बताया कि उनके ऐप के जरिए किसान को यह जानकारी मिलती है कि किस हिस्से में ज्यादा पानी या उर्वरक की जरूरत है। इससे लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है। निवेशकों के लिए यह सेक्टर इसलिए भी आकर्षक है क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय से है।
4. साइबर सुरक्षा और ‘एथिकल AI’: खतरे के साथ अवसर
AI जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से उसके दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ रही है। ‘डीपफेक’ वीडियो, पहचान की चोरी और डिजिटल फ्रॉड जैसी घटनाएं चिंता का कारण बन रही हैं।
समिट में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में AI ऑडिटिंग और डिजिटल सुरक्षा समाधान की मांग कई गुना बढ़ सकती है। कंपनियां ऐसे सिस्टम चाहेंगी जो उनके AI मॉडल्स को सुरक्षित और पारदर्शी रखें।
अगर कोई स्टार्टअप AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, डेटा प्रोटेक्शन या डिजिटल ऑथेंटिकेशन पर काम कर रहा है, तो उसके लिए बाजार तैयार है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां जरूरत लगातार बढ़ती रहेगी, क्योंकि तकनीक जितनी उन्नत होगी, जोखिम भी उतने ही जटिल होंगे।
5. शिक्षा में नया अध्याय: हर छात्र का अपना ‘AI ट्यूटर’
समिट के दौरान शिक्षा क्षेत्र पर भी गहरी चर्चा हुई। यह विचार सामने आया कि भविष्य में हर छात्र के पास एक व्यक्तिगत AI ट्यूटर हो सकता है, जो उसकी गति और क्षमता के अनुसार पढ़ाई को अनुकूलित करे।
रटने वाली शिक्षा से आगे बढ़कर, विश्लेषणात्मक और कौशल आधारित सीखने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म जो छात्र की कमजोरी पहचानकर उसी अनुसार पाठ्यक्रम को कस्टमाइज़ करें, वे शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
एडटेक सेक्टर ने महामारी के दौरान तेजी देखी थी, लेकिन अब अगला चरण अधिक व्यक्तिगत और डेटा-आधारित होने जा रहा है। यह केवल ऑनलाइन क्लास का विस्तार नहीं, बल्कि सीखने के तरीके का पुनर्गठन हो सकता है।
समिट का बड़ा संदेश: AI एक तकनीक नहीं, आर्थिक ढांचा
भारत मंडपम के गलियारों में घूमते हुए साफ महसूस होता है कि AI अब केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की चर्चा का विषय नहीं है। यह नीति निर्माताओं, निवेशकों और छोटे उद्यमियों—सभी के एजेंडे में शामिल हो चुका है।
‘India AI Impact Summit 2026’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में वही लोग आगे बढ़ेंगे जो AI को केवल काम आसान करने के उपकरण की तरह नहीं, बल्कि नई समस्याओं को हल करने के साधन के रूप में देखेंगे।
यह समिट केवल घोषणाओं का मंच नहीं, बल्कि संकेतों का आईना है। संकेत इस बात के कि भारत AI की वैश्विक दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। और संकेत इस बात के भी कि अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो छोटे स्टार्टअप्स भी बड़ी छलांग लगा सकते हैं।
अब सवाल यह नहीं है कि AI आएगा या नहीं। सवाल यह है कि जब यह पूरी तरह से मुख्यधारा में होगा, तब आप किस भूमिका में होंगे—दर्शक या भागीदार?
