भारत-पाक मैच पर सस्पेंस! पाकिस्तान ने बिछाया था जाल, ICC और UAE ने कर दी बोलती बंद।
क्रिकेट की दुनिया में अगर किसी एक मुकाबले का नाम सुनते ही दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है, तो वह है भारत बनाम पाकिस्तान (IND vs PAK)। यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और करोड़ों दर्शकों से जुड़ा एक ऐसा आयोजन है, जो पूरे वर्ल्ड कप की धुरी माना जाता है। लेकिन एक बार फिर यह हाई-वोल्टेज मुकाबला मैदान की बजाय बोर्डरूम की राजनीति में फंसता दिख रहा है।
इस बार विवाद की जड़ है पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की वह मांग, जिसे कई क्रिकेट विशेषज्ञ खुली ‘ब्लैकमेलिंग’ करार दे रहे हैं। आरोप है कि PCB ने आगामी T20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच खेलने के बदले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से भारी मुआवजे की मांग रख दी। हालांकि, ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक ICC और UAE क्रिकेट बोर्ड ने मिलकर पाकिस्तान की इस रणनीति को नाकाम कर दिया है।
दुबई में 4 घंटे की मैराथन मीटिंग, लेकिन नतीजा सिफर
इस पूरे विवाद की शुरुआत दुबई में हुई एक आपातकालीन बैठक से हुई, जहां ICC, PCB और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। करीब चार घंटे तक चली इस मीटिंग में माहौल काफी तनावपूर्ण बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, PCB के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर नहीं आती है, तो भारत–पाकिस्तान वर्ल्ड कप मैच के बदले PCB को “भारी वित्तीय मुआवजा” दिया जाना चाहिए। नकवी का तर्क था कि भारत के पाकिस्तान न आने से PCB को पहले भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और अब उसकी भरपाई जरूरी है।
हालांकि, इस मांग ने ICC के अधिकारियों को हैरान कर दिया। मीटिंग में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह पहली बार था जब किसी बोर्ड ने मैच खेलने को लेकर खुले तौर पर मुआवजे की शर्त रखी हो।”
PCB की तीन शर्तें, जिन्होंने बढ़ाया विवाद
मीटिंग के दौरान PCB ने ICC के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखीं, जिन्होंने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया:
- विशेष मुआवजा फंड की मांग: PCB ने कहा कि भारत के पाकिस्तान न आने से उसे जो ‘पुराना नुकसान’ हुआ है, उसकी भरपाई के लिए एक अलग फंड बनाया जाए।
- हाइब्रिड मॉडल पर भविष्य में रोक: पाकिस्तान चाहता है कि भविष्य के ICC टूर्नामेंट्स में ‘हाइब्रिड मॉडल’ को लिखित रूप से प्रतिबंधित किया जाए, ताकि मुकाबले पाकिस्तान में ही हों।
- रेवेन्यू शेयरिंग में बड़ा हिस्सा: PCB ने ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू में अपने लिए ज्यादा प्रतिशत की मांग भी रखी।
इन शर्तों को सुनने के बाद ICC और अन्य बोर्ड्स के प्रतिनिधियों ने साफ संकेत दे दिया कि मामला आसान नहीं होने वाला।
ICC का सख्त रुख: “ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं”
PCB को उम्मीद थी कि भारत–पाकिस्तान मैच की अहमियत को देखते हुए ICC उसकी शर्तों के आगे झुक जाएगा। लेकिन हुआ ठीक उलटा। ICC ने साफ शब्दों में कह दिया कि किसी भी बोर्ड को टूर्नामेंट या मैच के नाम पर ‘दबाव बनाने’ की इजाजत नहीं दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, ICC अधिकारियों ने यह भी इशारा दिया कि अगर कोई बोर्ड जानबूझकर टूर्नामेंट में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है—even टूर्नामेंट से बाहर करने तक का विकल्प खुला है।
यह बयान PCB के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
UAE की एंट्री और पाकिस्तान को लगी कड़ी फटकार
इस पूरे विवाद में जब UAE क्रिकेट बोर्ड ने अपनी राय रखी, तो पाकिस्तान पूरी तरह बैकफुट पर आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE के अधिकारियों ने PCB को उसका पुराना दौर याद दिलाते हुए तीखे शब्दों में चेतावनी दी।
UAE की ओर से कहा गया,
“जब पाकिस्तान में हालात ऐसे थे कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नामुमकिन हो गया था, तब UAE ने ही आपको सालों तक ‘होम ग्राउंड’ दिया। आज आप चंद पैसों के लिए वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन को खतरे में डाल रहे हैं—यह न सिर्फ गलत है, बल्कि शर्मनाक भी है।”
इस बयान के बाद मीटिंग का माहौल और तल्ख हो गया। PCB के प्रतिनिधि इस टिप्पणी का कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए।
ब्रॉडकास्टर्स का दबाव और PCB की आर्थिक तंगी
क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि PCB की यह पूरी रणनीति उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति से जुड़ी है। भारत–पाकिस्तान मैच दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला क्रिकेट मुकाबला है। अगर यह मैच नहीं होता, तो ब्रॉडकास्टर्स को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
PCB इसी दबाव का फायदा उठाना चाहता था। उसका मानना था कि ICC और ब्रॉडकास्टर्स किसी भी कीमत पर यह मैच कराना चाहेंगे और अंततः पाकिस्तान की शर्तें मान लेंगे। लेकिन ICC ने इस बार साफ कर दिया है कि वह ऐसी रणनीति के आगे झुकने वाला नहीं है।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड भी नाराज़
इस मीटिंग में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की भूमिका भी अहम रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, BCB ने भी PCB के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे विवाद पूरे टूर्नामेंट की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
BCB का मानना है कि क्रिकेट को राजनीतिक और वित्तीय दबाव से ऊपर रखा जाना चाहिए, खासकर तब जब करोड़ों फैंस इस खेल से भावनात्मक रूप से जुड़े हों।
अब आगे क्या? पाकिस्तान के सामने मुश्किल फैसला
फिलहाल यह मीटिंग बिना किसी आधिकारिक प्रेस रिलीज के खत्म हो गई है। लेकिन अंदरखाने जो संकेत मिल रहे हैं, वे PCB के लिए अच्छे नहीं हैं। अब गेंद पूरी तरह पाकिस्तान के पाले में है।
या तो PCB अपनी मुआवजे वाली जिद छोड़कर मैदान पर क्रिकेट खेले,
या फिर अपनी हठधर्मिता के चलते न सिर्फ करोड़ों रुपये के रेवेन्यू से हाथ धो बैठे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी साख को भी गंभीर नुकसान पहुंचाए।
एक वरिष्ठ क्रिकेट विश्लेषक के शब्दों में,
“भारत–पाकिस्तान मैच से ज्यादा बड़ा कोई बोर्ड नहीं होता। अगर PCB इसे नहीं समझ पाया, तो आने वाले सालों में इसकी कीमत उसे भारी पड़ सकती है।”
निष्कर्ष: क्रिकेट बनाम राजनीति, कौन जीतेगा?
भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से क्रिकेट से कहीं ज्यादा रहा है। लेकिन जब यह मुकाबला बार-बार राजनीति, दबाव और ब्लैकमेलिंग की भेंट चढ़ता है, तो नुकसान सिर्फ बोर्ड्स का नहीं, बल्कि खेल का होता है।
ICC और UAE ने इस बार सख्त रुख दिखाकर यह साफ कर दिया है कि क्रिकेट को बंधक नहीं बनाया जा सकता। अब देखना यह है कि पाकिस्तान इस संकेत को समझता है या फिर एक और मौका अपने ही हाथों से गंवा देता है।
एक बात तय है—अगर IND vs PAK मैच खतरे में पड़ा, तो इतिहास में यह सिर्फ एक रद्द मुकाबला नहीं, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक चूक के तौर पर याद किया जाएगा।
