बर्फबारी नहीं, ये तो आफत है! क्या इस बर्फबारी के बाद रुक जाएगी केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम यात्रा?
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम—खासतौर पर केदारनाथ और बद्रीनाथ—में मौसम ने अचानक ऐसा रंग बदला कि पूरा इलाका सफेद चादर में ढक गया। पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बर्फबारी अब खूबसूरती से ज्यादा मुसीबत बनती नजर आ रही है।
तेज बर्फबारी के चलते जनजीवन ठप, तापमान माइनस में और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
धामों में भारी बर्फ, संपर्क लगभग टूटा
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक:
- केदारनाथ धाम में 3 फीट से ज्यादा ताजा बर्फ जम चुकी है
- बद्रीनाथ धाम में भी करीब 2 फीट बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है
लगातार गिरती बर्फ को देखते हुए प्रशासन ने इन इलाकों में ‘सफेद अलर्ट’ जारी कर दिया है।
तापमान माइनस में
- दोनों धामों में न्यूनतम तापमान माइनस 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया
- पानी की पाइपलाइनें जम गई हैं
- कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है
रास्ते बंद, मशीनें तैनात लेकिन चुनौती बरकरार
भारी बर्फबारी के कारण:
- केदारनाथ और बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप
- बर्फ हटाने के लिए मशीनें लगाई गई हैं
लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी राहत कार्य में बाधा डाल रही है
प्रशासन का कहना है कि हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है।
क्या चारधाम यात्रा पर पड़ेगा असर?
फिलहाल राहत की बात यह है कि:
- केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट पहले से ही सर्दियों के लिए बंद हैं
- इस समय केवल सांकेतिक पूजा हो रही है
- धामों में सीमित संख्या में साधु-संत और सुरक्षाकर्मी ही मौजूद हैं
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि:
अभी यात्रा सीजन शुरू नहीं हुआ है, इसलिए यात्रा रोकने का सवाल नहीं है।
हालांकि, ऊंचाई वाले इलाकों में फंसे लोगों को निचले क्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई है।
अगले 48 घंटे और भारी: मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 48 घंटों तक:
- उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बर्फबारी जारी रह सकती है
- मैदानी इलाकों में शीतलहर का प्रकोप और बढ़ेगा
इसको देखते हुए:
- SDRF और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी की गई है
निष्कर्ष: सुंदरता के साथ सावधानी जरूरी
केदारनाथ और बद्रीनाथ की बर्फबारी भले ही देखने में बेहद खूबसूरत हो,
लेकिन इस समय यह खतरे की घंटी भी है।
प्रशासन की सलाह मानना और अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
पहाड़ों में मौसम पलभर में बदलता है—और इस वक्त सतर्कता ही सुरक्षा है।
