मार्केट

कैसे एक झटके में बदल गया गोल्ड मार्केट? जानें इस भारी उछाल के पीछे का असली खेल।

वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई सवालों के घेरे में है। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में मंदी की आशंका, ऊंची ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजारों की लगातार बदलती चाल—इन सबने निवेशकों को असमंजस में डाल रखा है। लेकिन इसी अनिश्चित माहौल के बीच भारत से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ बाजार विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि भारतीय निवेशक अब पहले से कहीं ज्यादा समझदारी और दूरदृष्टि के साथ फैसले ले रहे हैं।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) में निवेश में करीब 98% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। यह बढ़त सिर्फ एक सामान्य आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह निवेशकों की बदलती सोच और प्राथमिकताओं का साफ संकेत देती है। दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड वैश्विक बाजारों से बिल्कुल उलट है, जहां कई देशों में गोल्ड ETF से पैसा निकल रहा है। सवाल यह है कि आखिर भारत में सोने के इस डिजिटल रूप को लेकर इतना भरोसा क्यों बढ़ा है?

अनिश्चित समय में ‘सुरक्षित ठिकाने’ की तलाश

इतिहास गवाह है कि जब-जब बाजारों में उथल-पुथल होती है, निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं। सोना हमेशा से ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश माना गया है। लेकिन इस बार फर्क यह है कि निवेशक फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड ETF को चुन रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि मौजूदा दौर में निवेशक सुरक्षा के साथ-साथ सुविधा और पारदर्शिता भी चाहते हैं।

पिछले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कभी सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाइयों को छूते हैं, तो कभी अचानक बड़ी गिरावट निवेशकों को डरा देती है। ऐसे में कई निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए सोने का सहारा लिया। गोल्ड ETF ने उन्हें यह मौका दिया कि वे बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे, सोने की कीमतों में हिस्सेदारी ले सकें।

98% उछाल के पीछे छिपी असली वजहें

बाजार जानकारों का मानना है कि गोल्ड ETF में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे एक नहीं, बल्कि कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है—शेयर बाजार की अस्थिरता। जब इक्विटी बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो निवेशक ऐसे विकल्प ढूंढते हैं जो उनके निवेश को कुछ हद तक सुरक्षित रख सकें। सोना इस भूमिका में हमेशा खरा उतरा है।

दूसरा बड़ा कारण टैक्स से जुड़े बदलाव हैं। बजट 2024-25 में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क में कटौती की और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के नियमों को पहले से ज्यादा स्पष्ट और निवेशक-अनुकूल बनाया। इससे गोल्ड ETF की टैक्स एफिशिएंसी बढ़ी और निवेशकों का झुकाव इसकी ओर और मजबूत हुआ।

तीसरा कारण है डिजिटल सुरक्षा और सुविधा। फिजिकल गोल्ड खरीदने पर मेकिंग चार्ज, स्टोरेज की चिंता और शुद्धता को लेकर सवाल बने रहते हैं। वहीं गोल्ड ETF में निवेश करते समय इन सब परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है। खासकर युवा निवेशक, जो मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करने के आदी हैं, वे डिजिटल गोल्ड और ETF को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

वैश्विक तनाव और सोने की चमक

रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। जब दुनिया के बड़े हिस्सों में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर सवाल उठते हैं, तो निवेशक स्वाभाविक रूप से ऐसे एसेट्स की ओर भागते हैं, जो मूल्य को बनाए रखने में सक्षम हों। सोना सदियों से इस कसौटी पर खरा उतरता आया है।

हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में ऊंची ब्याज दरों के चलते गोल्ड ETF से आउटफ्लो देखने को मिला है। वहां निवेशक बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स की ओर झुक रहे हैं। इसके उलट, भारत में मजबूत घरेलू मांग, त्योहारों और शादियों का सीजन, और सोने के प्रति सांस्कृतिक लगाव ने इसकी मांग को लगातार बनाए रखा है।

भारत की राह दुनिया से अलग क्यों?

भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, सोना भारतीय जीवन का अहम हिस्सा रहा है। लेकिन अब निवेशकों ने सोने को सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रखा है। वे इसे एक ऐसे लिक्विड एसेट के रूप में देख रहे हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत कैश में बदला जा सकता है।

गोल्ड ETF ने इस सोच को और मजबूती दी है। शेयर की तरह एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला यह इंस्ट्रूमेंट निवेशकों को यह सुविधा देता है कि वे कभी भी बाजार भाव पर इसे खरीद या बेच सकें। यही वजह है कि जब वैश्विक बाजारों में गोल्ड ETF से पैसा निकल रहा है, तब भारत में इसमें रिकॉर्ड निवेश देखने को मिल रहा है।

क्या यह निवेश का सही समय है?

इस सवाल का जवाब एक जैसा नहीं हो सकता, क्योंकि यह हर निवेशक के लक्ष्य और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। यह सच है कि सोने की कीमतें इस समय अपने उच्चतम स्तर के आसपास हैं। ऐसे में शॉर्ट टर्म में मुनाफे की उम्मीद लेकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखें, तो सोना अब भी एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का 10% से 15% हिस्सा गोल्ड ETF में रखना चाहिए। इससे पोर्टफोलियो का जोखिम संतुलित रहता है। साथ ही, एकमुश्त निवेश करने की बजाय SIP मोड में धीरे-धीरे खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जाती है, खासकर तब जब कीमतें ऊंचे स्तर पर हों।

गोल्ड ETF: फायदे जो इसे खास बनाते हैं

  • गोल्ड ETF की सबसे बड़ी खासियत है इसकी शुद्धता। इसमें निवेश करने पर 99.5% शुद्ध सोने की कीमत से सीधा जुड़ाव होता है।
  • फिजिकल गोल्ड की तरह इसमें मिलावट या गुणवत्ता को लेकर चिंता नहीं रहती।
  • शेयर बाजार खुला हो तो गोल्ड ETF को कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है।
  • न मेकिंग चार्ज, न स्टोरेज का खर्च।
  • इसकी कीमतें पूरी तरह पारदर्शी होती हैं और लाइव मार्केट रेट से जुड़ी रहती हैं।

निष्कर्ष: बदलती सोच, स्मार्ट निवेश

भारत में गोल्ड ETF में आया 98% का उछाल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारतीय निवेशक तेजी से परिपक्व हो रहे हैं। वे अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर ऐसे निवेश विकल्प चुन रहे हैं, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ सुविधाजनक और पारदर्शी भी हों।

अनिश्चित वैश्विक माहौल में गोल्ड ETF भारतीय निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। अगर आप भी अपने निवेश को संतुलित करना चाहते हैं और भविष्य की अनिश्चितताओं से खुद को कुछ हद तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सोने के इस डिजिटल रूप पर नजर डालना गलत नहीं होगा। शायद यही वजह है कि जब दुनिया दुविधा में है, तब भारत आत्मविश्वास के साथ गोल्ड ETF की ओर कदम बढ़ा रहा है।