गाजा में एक और खौफनाक सुबह: क्या फिर शुरू होगा महायुद्ध?
गाजा पट्टी में बुधवार की सुबह एक बार फिर गोलियों और धमाकों की आवाज़ों के साथ शुरू हुई। जब लोग नींद से जाग रहे थे, तब आसमान से बरसते हमलों ने कई परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इज़रायली सेना द्वारा किए गए ताज़ा हवाई और ज़मीनी हमलों में कम से कम 17 फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
ये हमले ग़ज़ा के उत्तरी इलाक़ों से लेकर दक्षिण में स्थित ख़ान यूनिस तक फैले हुए थे। जिन इलाक़ों को निशाना बनाया गया, वे ज़्यादातर रिहायशी क्षेत्र थे। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिसकी पुष्टि स्थानीय अस्पतालों और राहतकर्मियों ने की है।
मलबे में दबे लोग, हर तरफ़ चीख-पुकार
हमलों के बाद का मंजर बेहद डरावना है। कई इमारतें पूरी तरह ज़मीनदोज़ हो चुकी हैं, जबकि कुछ इमारतें इतनी क्षतिग्रस्त हैं कि उनके गिरने का ख़तरा बना हुआ है। राहत और बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और लगातार जारी हमलों के कारण उनका काम बेहद मुश्किल हो गया है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया,
“हमने पहले धमाके की आवाज़ सुनी, फिर सब कुछ अंधेरे और धुएं में डूब गया। जब बाहर निकले तो देखा कि पड़ोस का पूरा घर खत्म हो चुका था।”
स्थानीय अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई घायलों को फ़र्श पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है क्योंकि बेड और ज़रूरी मेडिकल उपकरणों की भारी कमी है।
कहां-कहां हुए हमले?
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार सुबह उत्तरी गाजा के कई इलाक़ों में ज़ोरदार विस्फोट हुए। इसके अलावा दक्षिणी गाजा के ख़ान यूनिस क्षेत्र में भी इज़रायली हमले किए गए। इन इलाक़ों में पहले से ही बड़ी संख्या में विस्थापित लोग शरण लिए हुए थे।
हमलों में रिहायशी इमारतों, सड़कों और कुछ बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा है। कई परिवार ऐसे हैं जो पहले ही अपने घर खो चुके थे और अब दूसरी बार बेघर हो गए हैं।
इज़रायली सेना का पक्ष
इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने इन हमलों को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि सेना ने “आतंकवादी बुनियादी ढांचे” को निशाना बनाया है। IDF का दावा है कि ये कार्रवाई उत्तरी ग़ज़ा में उनके एक सैनिक के घायल होने के बाद की गई।
सेना का यह भी कहना है कि हमलों से पहले “नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानियां बरती गईं।” हालांकि, ज़मीन पर मौजूद हालात और मृतकों की संख्या इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
महिलाओं और बच्चों की मौत पर बढ़ी चिंता
हमलों में महिलाओं और बच्चों की मौत की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय डॉक्टरों के अनुसार, कई बच्चे गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल लाए गए, जिनमें से कुछ की हालत नाज़ुक बनी हुई है।
एक डॉक्टर ने कहा,
“हम केवल ज़िंदगियां बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दवाइयों, बिजली और उपकरणों की कमी हमारे हाथ बांध देती है।”
गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति
इन ताज़ा हमलों ने गाजा में पहले से मौजूद मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। महीनों से जारी संघर्ष के कारण ग़ज़ा के अस्पताल, स्कूल और बुनियादी सेवाएं लगभग चरमरा चुकी हैं।
अस्पतालों पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच ईंधन और दवाइयों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। कई अस्पतालों में जनरेटर चलाने के लिए ईंधन तक उपलब्ध नहीं है, जिससे सर्जरी और इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने गाजा में स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों के बीच आम नागरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
एक अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था के प्रतिनिधि ने कहा,
“गाजा में नागरिकों के लिए सुरक्षित जगह लगभग खत्म हो चुकी है। हर नया हमला मानवीय संकट को और भयावह बना देता है।”
राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव
इन घटनाओं के बाद एक बार फिर इज़रायल-फ़लस्तीन संघर्ष पर वैश्विक बहस तेज़ हो गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि कुछ देशों ने नागरिकों की मौत पर चिंता जताते हुए जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर केवल गाजा या इज़रायल तक सीमित नहीं रहेगा।
आम लोगों की टूटती उम्मीदें
गाजा के आम नागरिकों के लिए यह केवल आंकड़ों की लड़ाई नहीं है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी की जंग है। हर सुबह यह डर लेकर शुरू होती है कि अगला धमाका कहां होगा। बच्चों की पढ़ाई, परिवारों का भविष्य और सामान्य जीवन—सब कुछ अनिश्चितता के साये में है।
एक बुज़ुर्ग फ़लस्तीनी महिला ने कहा,
“हम शांति चाहते हैं, बस इतना चाहते हैं कि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें।”
आगे क्या?
फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हमलों के रुकने या संघर्ष के शांत होने के कोई साफ़ संकेत नहीं दिख रहे हैं। गाजा के लोग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं कि शायद इस बार हालात बदलें।
लेकिन ज़मीन पर मौजूद सच्चाई यही है कि हर बीतते दिन के साथ गाजा में इंसानी पीड़ा और गहरी होती जा रही है—और इसका कोई त्वरित समाधान नज़र नहीं आ रहा।
