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Black Day 2026: आज ही के दिन लहूलुहान हुई थी घाटी, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ शहीदों का आखिरी संदेश

आज 14 फरवरी है। दुनिया के कई देशों में लोग इसे ‘वैलेंटाइन डे’ के रूप में मना रहे हैं, लेकिन भारत के लिए यह तारीख एक ऐसे दर्द की याद लेकर आती है, जिसे भुला पाना आसान नहीं। सात साल पहले, 14 फरवरी 2019 की दोपहर, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुआ आत्मघाती हमला देश के दिल पर गहरा घाव बनकर दर्ज हो गया। आज उस हमले की 7वीं बरसी है, जिसे देशभर में ‘ब्लैक डे’ के तौर पर याद किया जा रहा है।

सुबह से ही सोशल मीडिया पर #PulwamaAttack और #BlackDay ट्रेंड कर रहा है। लोग शहीदों की तस्वीरें साझा कर उन्हें नमन कर रहे हैं। कई जगहों पर कैंडल मार्च निकाले गए, तो कहीं स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

सोशल मीडिया पर शहीदों की यादें फिर ताजा

बरसी के मौके पर उन 40 जवानों की पुरानी तस्वीरें, वीडियो और परिवार को भेजे गए संदेश एक बार फिर सामने आ रहे हैं। एक जवान का अपनी छोटी बेटी से वीडियो कॉल पर किया गया वादा, किसी का मां को भेजा गया आखिरी मैसेज—इन झलकियों ने लोगों को भावुक कर दिया है।

कई यूजर्स लिख रहे हैं—“हम भूले नहीं हैं, हम माफ नहीं करेंगे।” कुछ लोग शहीदों के परिवारों की मजबूती को सलाम कर रहे हैं। सात साल बीत जाने के बाद भी यह घटना लोगों की स्मृति में उतनी ही ताजा है, जितनी उस दिन थी।

घाटी में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

बरसी को देखते हुए कश्मीर घाटी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह चौकन्नी हैं।

  • चप्पे-चप्पे पर पहरा: श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर सीआरपीएफ (CRPF) और सेना के जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
  • ड्रोन से निगरानी: संवेदनशील इलाकों और पुलवामा के लेथपोरा स्मारक के आसपास ड्रोन से लगातार नजर रखी जा रही है।
  • सघन चेकिंग: हाईवे से गुजरने वाले हर वाहन की जांच की जा रही है। कई जगहों पर अस्थायी नाके लगाए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह नियमित एहतियाती कदम हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

क्या हुआ था 14 फरवरी 2019 को?

14 फरवरी 2019 की दोपहर करीब 3:15 बजे, सीआरपीएफ का 78 वाहनों का काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर बढ़ रहा था। इस काफिले में लगभग 2500 जवान शामिल थे। पुलवामा जिले के लेथपोरा इलाके में अचानक विस्फोटकों से लदी एक एसयूवी ने काफिले की एक बस को टक्कर मार दी।

धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए। सड़क पर धुआं, मलबा और अफरा-तफरी का दृश्य था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए। देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।

उस शाम टीवी स्क्रीन पर चलती खबरों ने हर घर को सन्न कर दिया था। स्कूलों से लेकर संसद तक, हर जगह गम और गुस्से का माहौल था।

लेथपोरा स्मारक पर श्रद्धांजलि

आज पुलवामा के लेथपोरा स्थित स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी और जवान पुष्पचक्र अर्पित कर अपने साथियों को नमन करेंगे।

प्रधानमंत्री Narendra Modi सहित कई केंद्रीय नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। संदेशों में उनके बलिदान को याद करते हुए देश की एकता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई है।

सात साल बाद भी जिंदा है याद

समय बीतता है, लेकिन कुछ तारीखें कैलेंडर से आगे जाकर दिलों में दर्ज हो जाती हैं। पुलवामा हमला ऐसी ही एक तारीख है। जिन परिवारों ने अपने बेटे, पति या पिता को खोया, उनके लिए यह दिन सिर्फ एक बरसी नहीं, बल्कि यादों का सैलाब है।

कई शहीदों के गांवों में आज विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं। कुछ जगहों पर स्कूलों में बच्चों ने पोस्टर बनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। गांवों में बने स्मारकों पर लोग फूल चढ़ाने पहुंचे।

देश की सुरक्षा और सबक

पुलवामा हमले के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए गए। काफिलों की मूवमेंट के नियमों में संशोधन हुआ, निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले केवल सुरक्षा का सवाल नहीं होते, बल्कि देश की सामूहिक चेतना को झकझोर देते हैं। पुलवामा ने यह याद दिलाया कि आतंकी खतरे के प्रति सतर्क रहना कितना जरूरी है।

एक दर्द, जो जोड़ता है देश को

पुलवामा की 7वीं बरसी पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही तस्वीरें एक साझा भावना को दिखाती हैं—शहीदों के प्रति सम्मान और उनके परिवारों के साथ खड़े रहने का संकल्प।

14 फरवरी कई लोगों के लिए प्यार का दिन हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह अपने वीर सपूतों को याद करने का दिन है। यह दिन याद दिलाता है कि सीमा पर और सड़कों पर तैनात जवानों की वजह से ही देश सुरक्षित है।

निष्कर्ष: यादों का बोझ, संकल्प की ताकत

सात साल पहले हुआ वह धमाका केवल एक बस को नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर गया था। आज जब देश ‘ब्लैक डे’ के रूप में इस दिन को याद कर रहा है, तो यह केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का भी दिन है—सुरक्षा, एकता और शहीदों के सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प।

पुलवामा के लेथपोरा में बने स्मारक पर चढ़ाए गए फूल भले ही कुछ दिनों में मुरझा जाएं, लेकिन उन 40 जवानों की याद और उनका बलिदान देश की स्मृति में हमेशा जीवित रहेगा।