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दुनिया

लेबनान और सीरिया में इज़राइल ने किसे बनाया निशाना? ईरान के वो ‘गुप्त ठिकाने’ जो एक झटके में हुए राख!

मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बीती रात इज़राइल की वायुसेना ने एक साथ दो देशों—लेबनान और सीरिया—में कई ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है और दुनिया की निगाहें अब इस संघर्ष पर टिक गई हैं।

इज़राइल का दावा है कि यह कार्रवाई उन गुप्त ठिकानों के खिलाफ की गई, जहाँ से उसके खिलाफ बड़े हमलों की तैयारी की जा रही थी। वहीं दूसरी ओर ईरान और उससे जुड़े संगठनों ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और जवाब देने की बात कही है।

रात के अंधेरे में हुए इन हमलों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक आसमान में तेज रोशनी दिखाई दी और कुछ ही पलों में कई जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों के बाद कई इलाकों में दहशत का माहौल फैल गया।

इज़राइल का दावा: गुप्त सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

इज़राइली सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह हमला किसी सामान्य सैन्य ठिकाने पर नहीं था। उनका दावा है कि सीरिया और लेबनान में मौजूद कुछ गुप्त केंद्रों से इज़राइल के खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी।

सीरिया के दमिश्क के आसपास के इलाके में स्थित एक बड़े हथियार भंडार को मुख्य लक्ष्य बताया जा रहा है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार यह स्थान लंबे समय से निगरानी में था और माना जा रहा था कि यहां उन्नत मिसाइलें और अन्य हथियार रखे गए थे।

इसी तरह लेबनान के पूर्वी हिस्से, खासकर बेका घाटी के आसपास के क्षेत्रों में भी कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह इलाका लंबे समय से विभिन्न सशस्त्र संगठनों की गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है।

इज़राइल का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य संभावित खतरे को पहले ही खत्म करना था ताकि उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रात के धमाकों से दहले स्थानीय लोग

हमले के बाद लेबनान और सीरिया के कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। बेका घाटी के कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि रात करीब दो बजे अचानक आसमान में तेज रोशनी दिखाई दी।

कुछ ही सेकंड बाद जोरदार धमाकों की आवाज आई, जिससे आसपास के घरों की खिड़कियां तक हिल गईं। कई लोगों ने बताया कि वे अचानक नींद से जाग गए और बाहर निकलकर देखा तो दूर कहीं आग की लपटें दिखाई दे रही थीं।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि धमाके इतने जोरदार थे कि उन्हें लगा जैसे भूकंप आ गया हो। कई किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई दी।

आधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन में इज़राइल ने अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि स्टेल्थ तकनीक वाले विमान इस्तेमाल किए गए, जिनकी पहचान रडार सिस्टम के लिए करना मुश्किल होता है।

इसी वजह से हमला बहुत तेजी से हुआ और कई जगहों पर एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं मिला।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना अभी मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि हमले काफी सुनियोजित तरीके से किए गए थे।

ईरान की प्रतिक्रिया: इसे बताया उकसावे की कार्रवाई

इन हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान से जुड़ी सैन्य इकाइयों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। एक बयान में इस कार्रवाई को “खतरनाक उकसावा” बताया गया और कहा गया कि इसका जवाब दिया जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से जुड़े समूहों ने दावा किया है कि इज़राइल की ओर कई ड्रोन भेजे गए। हालांकि इज़राइल ने कहा है कि उसकी सुरक्षा प्रणाली ने अधिकांश खतरों को रास्ते में ही रोक दिया।

इस घटनाक्रम के बाद इज़राइल के कई शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। कुछ जगहों पर सायरन भी बजाए गए और लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका प्रभाव पड़ता है।

इसी वजह से इस ताजा घटनाक्रम के बाद कई देशों ने चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव बढ़ता है तो इसका असर तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और यहां की अस्थिरता से वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बदल सकती हैं।

तेल बाजार पर संभावित असर

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार अगर क्षेत्र में तनाव लगातार बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं।

इसका असर खासकर उन देशों पर पड़ेगा जो तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि बाजार की दिशा कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है, इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि कीमतें कितनी बढ़ेंगी।

क्या हालात और बिगड़ सकते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा देती हैं। हालांकि कई बार ऐसे हमलों के बाद कूटनीतिक बातचीत भी तेज हो जाती है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष किस तरह की रणनीति अपनाते हैं। अगर जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहता है तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व लंबे समय से तनाव और संघर्ष का केंद्र रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। इज़राइल द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं ने यह संकेत दे दिया है कि क्षेत्र में हालात तेजी से बदल सकते हैं।

दुनिया के कई देश अब इस उम्मीद में हैं कि स्थिति जल्द शांत हो और संघर्ष आगे न बढ़े। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इस घटना ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस बढ़ते तनाव को कम कर पाएगी या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप ले लेगा।