Assam Creating History: डिब्रूगढ़ में आज कुछ ऐसा होने जा रहा है जो पूरे उत्तर-पूर्व में पहले कभी नहीं हुआ!
आज का दिन असम और पूरे उत्तर–पूर्व के लिए सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम का दिन नहीं है, बल्कि उम्मीदों, गर्व और बदलते समय का प्रतीक बन गया है। सुबह से ही डिब्रूगढ़ की सड़कों पर हलचल है। जगह–जगह स्वागत द्वार, पारंपरिक पोशाकों में लोग, और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम—सब कुछ इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आज का दौरा साधारण नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर लोगों में उत्साह साफ झलक रहा है।
डिब्रूगढ़, जिसे अक्सर असम की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है, आज विकास और सुरक्षा के नए अध्याय का गवाह बनने जा रहा है। ब्रह्मपुत्र के किनारे बसा यह शहर लंबे समय से उत्तर–पूर्व के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है, लेकिन आज यह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और आधुनिक बुनियादी ढांचे के संगम का केंद्र बन गया है।
पहली बार: नेशनल हाईवे बना ‘रनवे’
इस दौरे का सबसे चर्चित और रणनीतिक महत्व वाला हिस्सा है—उत्तर–पूर्व की पहली नेशनल हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का उद्घाटन। डिब्रूगढ़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर तैयार की गई यह विशेष हवाई पट्टी अब जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमानों और भारी मालवाहक विमानों की लैंडिंग के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी।
स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य अपने आप में रोमांचकारी है। जिस सड़क पर रोज़ाना बसें और ट्रक चलते थे, आज वही सड़क कुछ घंटों के लिए हवाई पट्टी का रूप ले चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया है, और आसमान में उड़ते विमानों की आवाज़ लोगों को एक नए युग का अहसास करा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में बेहद कारगर साबित होती हैं। खासकर ऐसे समय में जब सीमा के पास तेजी से बुनियादी ढांचा मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उत्तर–पूर्व की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
यह पहली बार है जब पूर्वोत्तर भारत में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग को इस तरह विकसित किया गया है कि वह जरूरत पड़ने पर रनवे का काम कर सके। इससे भारतीय वायुसेना को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम किया जा सकेगा।
करोड़ों की परियोजनाओं का ‘महा–उद्घाटन’
प्रधानमंत्री का यह दौरा सिर्फ एक हवाई पट्टी तक सीमित नहीं है। डिब्रूगढ़ में आज कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी होना है, जिनसे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा
डिब्रूगढ़ और आसपास के इलाकों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस नए अस्पतालों की आधारशिला रखी जा रही है। लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कर रहे लोगों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अब बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ेगा।
कनेक्टिविटी में सुधार
उत्तर–पूर्व के विकास में सबसे बड़ी चुनौती रही है—कनेक्टिविटी। आज जिन सड़क और पुल परियोजनाओं की शुरुआत हो रही है, उनका मकसद दूरदराज के इलाकों को मुख्य शहरों से जोड़ना है। बेहतर सड़कें न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा देंगी, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान बनाएंगी।
रोजगार और उद्योग को बढ़ावा
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से उद्योगों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं भी की जा रही हैं। ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के जरिए क्षेत्र के उद्यमियों को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। चाय उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना पर जोर है।
सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव
डिब्रूगढ़ की यह हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा रणनीति में बदलाव का संकेत भी है। अब वायुसेना को केवल पारंपरिक एयरबेस पर निर्भर नहीं रहना होगा। जरूरत पड़ने पर हाईवे भी अस्थायी एयरबेस का काम कर सकेंगे।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह की पहल से किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी। उत्तर–पूर्व का इलाका भौगोलिक रूप से संवेदनशील है, और ऐसे में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा बन चुका है।
इसके साथ ही यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए भी गर्व का विषय है। उन्हें लगता है कि अब उत्तर–पूर्व केवल सीमावर्ती क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का केंद्र बन रहा है।
असम में जश्न का माहौल
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर डिब्रूगढ़ में उत्सव जैसा माहौल है। पारंपरिक असमिया नृत्य और संगीत के साथ स्वागत की तैयारियां की गई हैं। बाजारों में रौनक है और लोग सुबह से कार्यक्रम स्थल के आसपास जुटने लगे हैं।
स्थानीय व्यापारी मानते हैं कि इस तरह की परियोजनाओं से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। छात्रों और युवाओं में भी उत्साह है, क्योंकि वे इसे नए अवसरों की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
कई लोगों का कहना है कि लंबे समय तक उपेक्षित महसूस करने वाला उत्तर–पूर्व अब राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में हो रहे बदलाव इसका प्रमाण हैं।
दक्षिण–पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि असम और पूरा उत्तर–पूर्व भारत को दक्षिण–पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर बुनियादी ढांचा इस दिशा में अहम साबित होगा।
डिब्रूगढ़ में हो रही घोषणाएं केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित कर सकती हैं। यदि कनेक्टिविटी मजबूत होती है, तो यह इलाका ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत नए अवसरों का केंद्र बन सकता है।
लोगों की उम्मीदें और भविष्य की तस्वीर
हर बड़े कार्यक्रम के साथ उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। डिब्रूगढ़ के लोग चाहते हैं कि आज जिन परियोजनाओं की घोषणा हो रही है, वे समय पर पूरी हों और उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे।
स्थानीय युवाओं की नजर रोजगार और शिक्षा के अवसरों पर है, जबकि बुजुर्ग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आशान्वित हैं। किसानों को बेहतर सड़कों से बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
आज का दिन केवल उद्घाटन और भाषणों का नहीं, बल्कि एक संदेश का दिन है—उत्तर–पूर्व अब विकास और सुरक्षा की नई कहानी लिख रहा है।
डिब्रूगढ़ की इस ऐतिहासिक सुबह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बदलते भारत की तस्वीर में असम की भूमिका और मजबूत हो रही है। सड़क से रनवे तक का यह सफर केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और संकल्प का प्रतीक है।
जैसे–जैसे दिन आगे बढ़ेगा और कार्यक्रम पूरे होंगे, यह दिन उत्तर–पूर्व के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाएगा—एक ऐसा दिन जब विकास और सुरक्षा ने एक साथ कदम बढ़ाया।
