जानें ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ की वो 5 खूबियां जो इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं!
भारत की राजधानी दिल्ली के दिल, रायसीना हिल्स पर गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सत्ता के केंद्र की तस्वीर बदल दी। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ और नए केंद्रीय सचिवालय परिसर के ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ का भव्य उद्घाटन किया। यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस प्रशासनिक ढांचे की नई शुरुआत थी, जो आने वाले दशकों तक देश की नीतियों और फैसलों की दिशा तय करेगा।
लाल बलुआ पत्थर और आधुनिक वास्तुकला के संगम से तैयार यह परिसर औपनिवेशिक दौर की पहचान रहे साउथ ब्लॉक की परंपरा से आगे बढ़ता हुआ ‘नए भारत’ का प्रशासनिक चेहरा बनने जा रहा है। सरकार इसे ‘अमृत काल’ की कार्यशैली का प्रतीक बता रही है—जहां निर्णय तेज होंगे, प्रक्रियाएं डिजिटल होंगी और कामकाज पारदर्शी।
लेकिन सवाल यही है—आखिर इस नए पावर हाउस में ऐसा क्या है, जो इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और आधुनिक सरकारी परिसरों में शामिल करता है? आइए समझते हैं इसकी बड़ी खासियतें।
1. किले जैसी सुरक्षा, हाई-टेक निगरानी
‘सेवा तीर्थ’ को सुरक्षा के लिहाज से अभेद्य बनाने की कोशिश की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी इमारत को उच्चतम भूकंपीय मानकों (Zone V) के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा का सामना किया जा सके।
परिसर में बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। प्रवेश द्वारों पर फेस रिकग्निशन तकनीक, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और 24×7 निगरानी के लिए अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। पूरे क्षेत्र को डिजिटल सर्विलांस ग्रिड से जोड़ा गया है, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह ढांचा केवल बाहरी खतरे से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री और कैबिनेट की बैठकों के लिए विशेष रूप से सुरक्षित कक्ष बनाए गए हैं, जहां संचार पूरी तरह एन्क्रिप्टेड नेटवर्क पर आधारित होगा।
2. 100% पेपरलेस, पूरी तरह डिजिटल प्रशासन
नए PMO और कर्तव्य भवन की सबसे बड़ी पहचान इसका डिजिटल ढांचा है। इसे पूरी तरह पेपरलेस ऑफिस के रूप में विकसित किया गया है। फाइलों का आदान-प्रदान अब पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि सुरक्षित क्लाउड-आधारित नेटवर्क के जरिए होगा।
सभी मंत्रालयों और विभागों को हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क से जोड़ा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे फाइल मूवमेंट में लगने वाला समय घटेगा और निर्णय प्रक्रिया तेज होगी। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कोई फाइल किस स्तर पर लंबित है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी कामकाज में जवाबदेही भी मजबूत होगी। डिजिटल आर्काइविंग की सुविधा के कारण पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना भी आसान होगा।
3. नाम में छिपा संदेश: ‘सेवा’ और ‘कर्तव्य’
प्रधानमंत्री ने नए PMO का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा है। यह नाम सत्ता के पारंपरिक प्रतीक से हटकर एक नई सोच को दर्शाता है—कि यह स्थान शासन का केंद्र होने के साथ-साथ जनता की सेवा का स्थल है।
इसी तरह, नए सचिवालय भवनों को ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया गया है। यह नाम प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके दायित्व की याद दिलाने के उद्देश्य से चुना गया है। सरकार का कहना है कि यह नामकरण औपनिवेशिक मानसिकता से दूरी और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक कदम है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नामकरण केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संदेश भी देता है।
4. पर्यावरण के अनुकूल, ग्रीन बिल्डिंग मॉडल
‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन को पर्यावरण के लिहाज से भी आधुनिक मानकों पर तैयार किया गया है। परिसर में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग की व्यवस्था है। छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करेंगे।
बारिश के पानी के संचयन (रेनवॉटर Harvesting) की उन्नत प्रणाली बनाई गई है। इसके अलावा, वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अलग से वैज्ञानिक तंत्र विकसित किया गया है, जिससे परिसर को ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल की ओर ले जाया जा सके।
निर्माण एजेंसियों का दावा है कि इस परियोजना को ‘प्लैटिनम रेटेड ग्रीन बिल्डिंग’ के मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इससे ऊर्जा की बचत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने में मदद मिलेगी।
5. एक छत के नीचे मंत्रालय, बेहतर समन्वय
कर्तव्य भवन 1 और 2 की शुरुआत के साथ अब कई मंत्रालयों और विभागों के कार्यालय एक ही परिसर में काम कर सकेंगे। पहले अलग-अलग इमारतों में फैले विभागों के बीच समन्वय में समय लगता था।
अब अधिकारियों के मुताबिक, फाइलों और बैठकों के लिए बार-बार लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं होगी। अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर का मीडिया सेंटर भी परिसर के भीतर ही बनाया गया है।
प्रशासनिक सुधारों के जानकारों का कहना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम पड़ाव
यह उद्घाटन सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इस परियोजना के तहत संसद भवन, सचिवालय और अन्य प्रशासनिक ढांचों को आधुनिक रूप दिया जा रहा है।
समर्थकों का तर्क है कि पुराने ढांचे बढ़ती जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं थे, इसलिए नए, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम परिसर की आवश्यकता थी। वहीं, आलोचकों ने परियोजना की लागत और प्राथमिकताओं को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
हालांकि, उद्घाटन के मौके पर सरकार ने इसे प्रशासनिक दक्षता और दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम बताया।
क्या बदलेगी कामकाज की रफ्तार?
विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक इमारतें अपने आप में बदलाव की गारंटी नहीं होतीं, लेकिन वे बेहतर व्यवस्था की नींव जरूर रखती हैं। यदि डिजिटल सिस्टम का प्रभावी उपयोग हुआ और विभागों के बीच समन्वय मजबूत हुआ, तो नीतिगत फैसलों में तेजी आ सकती है।
साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन की मजबूती आने वाले समय में बेहद अहम होगी, क्योंकि अब प्रशासन का बड़ा हिस्सा डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: ईंट-पत्थर से आगे की कहानी
‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन केवल नई इमारतों का लोकार्पण नहीं है। यह उस प्रशासनिक सोच का प्रतीक है, जो खुद को तेज, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बताती है।
रायसीना हिल्स, जो दशकों से सत्ता का केंद्र रहा है, अब एक नए स्वरूप में दुनिया के सामने है। आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि क्या यह आधुनिक ढांचा वास्तव में शासन की गति और गुणवत्ता को बदल पाता है, या फिर यह केवल एक भव्य स्थापत्य उपलब्धि बनकर रह जाएगा।
फिलहाल इतना तय है—दिल्ली के इस ऐतिहासिक इलाके से अब नए दौर की प्रशासनिक कहानी लिखी जाएगी, और उसकी गूंज देश-दुनिया तक पहुंचेगी।
