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कानपुर पुलिस का बड़ा एक्शन: आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंचा तंबाकू किंग का बेटा शिवम मिश्रा!

कानपुर की सड़कों पर कुछ दिन पहले जो हुआ, उसने शहर को झकझोर कर रख दिया था। देर रात तेज रफ्तार से दौड़ती एक चमचमाती लैंबॉर्गिनी अचानक बेकाबू हुई और देखते ही देखते अफरातफरी मच गई। हादसे में कई लोग घायल हुए, गाड़ियों को नुकसान पहुंचा और सड़क पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। कुछ ही घंटों में यह मामला पूरे शहर की चर्चा बन गया। वजह सिर्फ हादसा नहीं था, बल्कि उस कार के पीछे बैठा नाम भी था—शहर के चर्चित तंबाकू कारोबारी का बेटा, शिवम मिश्रा।

हादसे के तुरंत बाद जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह थी कि आरोपी मौके से फरार हो गया। बताया गया कि वह अपनी करोड़ों की कार को वहीं छोड़कर भाग निकला। सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें वायरल होने लगीं। लोग सवाल उठा रहे थे—क्या इस मामले में भी रसूख जीत जाएगा? क्या कानून अमीर और गरीब के बीच फर्क करेगा? शहर में गुस्सा साफ दिख रहा था।

कई दिनों तक आंख-मिचौली

पुलिस के लिए यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि कानून और व्यवस्था की साख से जुड़ा मामला बन गया था। सूत्रों के मुताबिक, हादसे के बाद से ही शिवम मिश्रा लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। कभी किसी दोस्त के यहां रुकना, तो कभी शहर से बाहर निकलने की कोशिश—उसकी हर गतिविधि को छिपाने की कोशिश की जा रही थी।

कानपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम को इस केस की जिम्मेदारी दी गई। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। पुलिस ने उसके करीबी दोस्तों और व्यापारिक संपर्कों पर नजर रखी। जिन लोगों से उसका नियमित संपर्क था, उन सबकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कई संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन हर बार वह हाथ से निकल जाता था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टीम को लगातार इनपुट मिल रहे थे, लेकिन आरोपी बेहद सतर्क था। वह डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए अलग-अलग नंबरों का इस्तेमाल कर रहा था और अपने सर्कल को सीमित रखे हुए था।

‘इनसाइड स्टोरी’: कैसे हुआ आखिरकार गिरफ्तारी

आखिरकार, पुलिस को एक सटीक सूचना मिली। कहा जा रहा है कि शिवम शहर छोड़ने की तैयारी में था। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की रणनीति बनाई। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक संभावित रूट पर नजर रखी। देर रात की कार्रवाई में उसे दबोच लिया गया।

गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही शहर में हलचल मच गई। कई दिनों से चल रही चर्चाओं और अटकलों का अंत हो गया। पुलिस कमिश्नरेट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी भी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हादसे की रात क्या हुआ था?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे वाली रात लैंबॉर्गिनी काफी तेज रफ्तार में थी। कुछ लोगों का कहना है कि कार अनियंत्रित होकर कई वाहनों से टकराई। सड़क पर खड़े और गुजर रहे लोग इसकी चपेट में आ गए। घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी।

हादसे के बाद जो दृश्य था, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था—एक महंगी स्पोर्ट्स कार सड़क पर क्षतिग्रस्त हालत में खड़ी थी और आसपास भीड़ जमा थी। लेकिन ड्राइवर गायब था। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो शुरुआती जांच में ही कार का रजिस्ट्रेशन और मालिकाना हक सामने आ गया।

सोशल मीडिया का दबाव

इस मामले में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #LamborghiniCase और #JusticeForVictims जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोग लगातार गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। कई स्थानीय संगठनों ने भी पीड़ितों के समर्थन में आवाज उठाई।

कानपुर के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुलकर कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का है। अगर आरोपी को जल्दी गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो यह गलत संदेश जाता।

‘रसूख’ पर उठे सवाल

शहर में यह चर्चा आम थी कि क्या तंबाकू कारोबारी का बेटा होने के कारण कार्रवाई धीमी है? हालांकि पुलिस ने हर बार यही कहा कि जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना था कि बिना पुख्ता सबूत के गिरफ्तारी करना कानूनी रूप से सही नहीं होता।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी का सामाजिक या आर्थिक दर्जा कानून से ऊपर नहीं है। कमिश्नरेट के एक अधिकारी ने कहा, “हमारे लिए आरोपी सिर्फ आरोपी है। कानून सबके लिए समान है।”

अब आगे क्या?

फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि फरारी के दौरान उसे किन-किन लोगों ने पनाह दी। यदि यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर उसे छिपाया या भागने में मदद की, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस आज उसे कोर्ट में पेश कर सकती है, जहां रिमांड की मांग की जाएगी। रिमांड के दौरान पुलिस हादसे की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश करेगी—क्या उस रात वह नशे में था? क्या कार की स्पीड लिमिट से ज्यादा थी? क्या किसी और की भूमिका थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

पीड़ितों की स्थिति

हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज जारी है। कुछ परिवारों ने न्याय की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं, बल्कि सख्त सजा होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी लापरवाही से गाड़ी चलाने की हिम्मत न करे।

एक घायल युवक के परिजन ने कहा, “हम चाहते हैं कि कानून अपना काम करे। चाहे वह कोई भी हो, उसे उसके किए की सजा मिलनी चाहिए।”

शहर की साख और कानून की परीक्षा

यह मामला कानपुर के लिए सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि शहर की साख और कानून व्यवस्था की परीक्षा बन गया। जिस तरह से पुलिस ने तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच की, उससे यह साफ हुआ कि हाई-प्रोफाइल मामलों में भी कार्रवाई संभव है—अगर इच्छाशक्ति हो।

हालांकि अंतिम फैसला अदालत में होगा, लेकिन फिलहाल गिरफ्तारी ने यह संकेत जरूर दिया है कि सार्वजनिक दबाव और कानूनी प्रक्रिया मिलकर असर दिखा सकते हैं।

अब सबकी नजर अदालत की अगली तारीख पर टिकी है। क्या यह केस एक मिसाल बनेगा? क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।

इस हाई-प्रोफाइल ‘लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन’ केस की हर नई जानकारी के लिए जुड़े रहें। कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।