नौकरी

मिशन 2027: योगी सरकार का युवाओं को महा-तोहफा! सरकारी नौकरियों की लगेगी झड़ी?

उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में आज का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना 10वां बजट पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना जब बजट दस्तावेज लेकर सदन में खड़े हुए, तो माहौल में उत्सुकता साफ झलक रही थी। आगामी चुनावों की आहट के बीच पेश किया गया यह बजट सिर्फ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और विकासात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने इसे “युवा शक्ति, रोजगार और विकास” को समर्पित बजट बताया है, जबकि समर्थक इसे प्रदेश की दिशा बदलने वाला संभावित ‘गेमचेंजर’ मान रहे हैं।

इस बार बजट का फोकस स्पष्ट रूप से युवाओं और रोजगार पर रहा। सरकार ने अगले एक वर्ष में विभिन्न विभागों में 2 लाख से अधिक नई सरकारी भर्तियां करने का लक्ष्य रखा है। लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह घोषणा उम्मीद की नई किरण की तरह सामने आई है। सदन में जब यह आंकड़ा पढ़ा गया, तो सत्ता पक्ष की बेंचों से मेज थपथपाने की आवाजें गूंज उठीं।

रोजगार का ‘महा-अभियान’: युवाओं के लिए बड़ा संदेश

सरकार ने पुलिस विभाग में खाली पड़े पदों को भरने के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया है। गृह विभाग में लंबे समय से लंबित भर्तियों को गति देने की बात कही गई है। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र में भी माध्यमिक और उच्च शिक्षा के हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने का वादा किया गया है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों और कॉलेजों के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।

सिर्फ सरकारी नौकरी तक ही बात सीमित नहीं रखी गई। ‘स्टार्टअप इंडिया UP’ के तहत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना’ में ₹5,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे छोटे शहरों और कस्बों में भी उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। लक्ष्य यह है कि युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

शिक्षा और कौशल पर फोकस

योगी सरकार ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के संकेत भी दिए हैं। ‘पीएम श्री’ स्कूलों की तर्ज पर प्रदेश के 500 स्कूलों को अपग्रेड करने की घोषणा की गई है। इन स्कूलों में आधुनिक लैब, डिजिटल क्लासरूम और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही हर मंडल में एक ‘डिजिटल स्किल सेंटर’ खोलने की घोषणा की गई है, जहां युवाओं को नई तकनीकों और उद्योगों से जुड़े कौशल की ट्रेनिंग दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि सिर्फ डिग्री से रोजगार नहीं मिलता, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा ही युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाएगी। बजट में डिजिटल लर्निंग और तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए भी पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर: एक्सप्रेसवे से स्मार्ट सिटी तक

उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में सरकार ने नए लिंक एक्सप्रेसवे और ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए भारी बजट आवंटित किया है। सड़क नेटवर्क को मजबूत करने का मकसद न सिर्फ आवागमन आसान बनाना है, बल्कि औद्योगिक निवेश को भी आकर्षित करना है।

इसके अलावा 10 और शहरों को ‘स्मार्ट सिटी’ मिशन के तहत लाने का प्रस्ताव रखा गया है। शहरी विकास, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता और डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड जारी करने की बात कही गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह जोर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है।

किसानों और महिलाओं के लिए घोषणाएं

बजट में किसानों को भी साधने की कोशिश साफ दिखाई दी। मुफ्त सिंचाई और खाद सब्सिडी के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

महिलाओं के लिए ‘मिशन शक्ति’ के अगले चरण के लिए फंड बढ़ाने की घोषणा की गई है। महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता देने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की योजनाओं को भी विस्तार दिया गया है। सरकार का कहना है कि महिला सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन दोनों को साथ लेकर चलना प्राथमिकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी नजर

बजट में हर जिले में मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य को पूरा करने पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, जिला अस्पतालों के उन्नयन और नई स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण के लिए भी फंड आवंटित किया गया है। कोविड के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, और इस बजट में भी इसकी झलक दिखाई दी।

विपक्ष का हमला, सरकार का बचाव

जहां सत्ता पक्ष इसे ‘सर्वसमावेशी और ऐतिहासिक’ बजट बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया ‘चुनावी लॉलीपॉप’ करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि घोषणाएं बड़ी हैं, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते रहे हैं।

हालांकि आर्थिक विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों ने इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास पर दिए गए जोर की सराहना की है। उनका मानना है कि यदि घोषणाएं समय पर लागू होती हैं, तो इससे निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।

बजट 2026 की 5 बड़ी बातें

  • 2 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों का लक्ष्य तय।
  • सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटन।
  • 500 स्कूलों के अपग्रेड और डिजिटल स्किल सेंटर की घोषणा।
  • हर जिले में मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों और मध्यम वर्ग को राहत देने की कोशिश।

क्या यह सच में ‘गेमचेंजर’ होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बजट वाकई प्रदेश की दशा और दिशा बदल पाएगा? कागज पर घोषणाएं प्रभावशाली हैं और प्राथमिकताएं स्पष्ट दिखती हैं—युवा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, किसान और महिला सशक्तिकरण। लेकिन किसी भी बजट की असली परीक्षा उसके क्रियान्वयन में होती है।

फिलहाल, सरकार ने बड़ा दांव खेला है। चुनावी माहौल में पेश किया गया यह बजट राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है और विकास के नजरिए से भी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि घोषित योजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं और प्रदेश की अर्थव्यवस्था व युवाओं के भविष्य पर कितना असर डालती हैं। इतना जरूर है कि बजट 2026-27 ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास की बहस को नई दिशा दे दी है।