भारत

पीएम मोदी ने क्यों कहा- ‘पंडित दीनदयाल के बिना अधूरा है आधुनिक भारत’? जानिए आज का बड़ा संबोधन।

यह दिन सिर्फ एक श्रद्धांजलि का नहीं, बल्कि विचारों को दोबारा याद करने और आत्ममंथन का भी था। भारतीय जनसंघ के प्रमुख विचारक और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि, जिसे भारतीय जनता पार्टी ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाती है, इस बार भी पूरे देश में भावनात्मक और वैचारिक माहौल के साथ मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नमन करते हुए एक ऐसा संदेश दिया, जिसे उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे मजबूत नींव बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन और संदेशों के जरिए यह साफ किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय सिर्फ एक राजनीतिक विचारक नहीं थे, बल्कि भारत की आत्मा को समझने वाले मनीषी थे। पीएम ने कहा कि आज जब देश विकास के नए पड़ाव पर खड़ा है, तब दीनदयाल जी का ‘अंत्योदय’ का विचार पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।

‘अंत्योदय’—विकास का असली पैमाना

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जिस ‘मंत्र’ की सबसे ज्यादा चर्चा की, वह था—अंत्योदय। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का यह सिद्धांत केवल एक नारा नहीं, बल्कि शासन और समाज दोनों के लिए दिशा दिखाने वाला मार्ग है। पीएम मोदी के शब्दों में, “जब तक विकास का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी प्रगति को पूर्ण नहीं कहा जा सकता।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर देश का सबसे कमजोर नागरिक सशक्त होता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यही सोच आज सरकार की नीतियों और योजनाओं में दिखाई देती है—चाहे वह गरीबों के लिए आवास हो, मुफ्त राशन, स्वास्थ्य बीमा या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अंत्योदय का रास्ता ही भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की कुंजी है। यह मंत्र हर भारतीय के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, क्योंकि इसमें किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता शामिल है।

श्रद्धांजलि में दिखा शीर्ष नेतृत्व का सम्मान

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पंडित जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन राष्ट्र सेवा, सादगी और विचारों की दृढ़ता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि “आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की जो भावना सरकार के हर फैसले में दिखाई देती है, उसकी जड़ें पंडित दीनदयाल जी के विचारों में ही हैं।”

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एकात्म मानववाद का दर्शन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आज भी उतना ही उपयोगी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जब समाज और राष्ट्र कई तरह के संकटों से गुजर रहे हैं, तब दीनदयाल जी का विचार मानव केंद्रित विकास का रास्ता दिखाता है।

हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक हैं उनके विचार

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए भी देशवासियों को संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार हर पीढ़ी के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। पीएम ने युवाओं से अपील की कि वे उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

प्रधानमंत्री का मानना है कि दीनदयाल जी ने जिस तरह भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की बात की थी, वह आज के युवाओं के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कभी पश्चिमी मॉडल की अंधी नकल का समर्थन नहीं किया, बल्कि भारत की परिस्थितियों और मूल्यों के अनुरूप विकास की बात कही।

‘समर्पण दिवस’ के रूप में देशभर में आयोजन

भारतीय जनता पार्टी हर साल पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाती है। इस बार भी देश के कोने-कोने में संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों और सेवा कार्यों का आयोजन किया गया।

भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और विचारों पर चर्चा की और यह समझाने की कोशिश की कि कैसे उनका दर्शन आज के भारत की नीतियों में जीवंत रूप से दिखाई देता है। कई जगहों पर गरीबों की सेवा, स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर और अन्य सामाजिक कार्यों के जरिए उनके विचारों को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया गया।

पार्टी का कहना है कि समर्पण दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का दिन है—वैसा ही समर्पण, जैसा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने पूरे जीवन में दिखाया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय: विचार से कर्म तक

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, त्याग और विचारों की मजबूती का प्रतीक रहा। उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना। एकात्म मानववाद के जरिए उन्होंने यह समझाया कि व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और प्रकृति—सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

उनका मानना था कि विकास का केंद्र इंसान होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक आंकड़े। यही कारण है कि आज भी उनके विचार नीति-निर्माताओं और सामाजिक संगठनों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।

आज के भारत में क्यों जरूरी है अंत्योदय?

आज जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, तब यह सवाल भी उतना ही जरूरी है कि इस विकास का लाभ किसे मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी संदर्भ में यह साफ किया कि अंत्योदय का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी पीछे न छूटे।

गरीब, वंचित, आदिवासी, किसान, मजदूर—हर वर्ग तक विकास पहुंचे, यही अंत्योदय की आत्मा है। पीएम मोदी ने संकेत दिया कि सरकार की योजनाएं इसी सोच से प्रेरित हैं और आने वाले समय में भी यह दृष्टिकोण और मजबूत होगा।

मुख्य बातें एक नजर में

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • ‘अंत्योदय’ को उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण का सबसे बड़ा मंत्र बताया।
  • गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें नमन किया।
  • भाजपा पूरे देश में इस दिन को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मना रही है।
  • संगोष्ठियों और सेवा कार्यों के जरिए नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ा जा रहा है।

निष्कर्ष: विचार जो आज भी रास्ता दिखाते हैं

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर दिया गया यह संदेश केवल अतीत को याद करने का नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का संकेत भी है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि अंत्योदय सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आत्मा है।

आज जब देश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, तब यह याद दिलाना जरूरी है कि असली प्रगति वही है, जिसमें समाज का आखिरी व्यक्ति भी खुद को इस यात्रा का हिस्सा महसूस करे। शायद यही कारण है कि दशकों बाद भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं—और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतने ही जरूरी रहेंगे।