ट्रंप बोले- ‘मोदी मेरे दोस्त हैं’! भारत को मिला वो तोहफा जिसका पूरी दुनिया को था डर, क्या है ये ऐतिहासिक डील?
फरवरी 2026 की शुरुआत वैश्विक व्यापार इतिहास में एक ऐसे फैसले के साथ हुई है, जिसने वॉशिंगटन से लेकर नई दिल्ली और बीजिंग तक हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ जिस भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान किया है, वह सिर्फ दो देशों के बीच समझौता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक समीकरणों को नए सिरे से गढ़ने वाला कदम माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस से आई घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है भारत पर टैरिफ कटौती। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले भारी शुल्क को घटाकर सीधे 18 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित करने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
ट्रंप-मोदी दोस्ती फिर बनी गेम-चेंजर
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले के पीछे कोई कूटनीतिक भाषा नहीं, बल्कि साफ-साफ अपनी निजी केमिस्ट्री का जिक्र किया। उन्होंने कहा,
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। भारत एक भरोसेमंद साझेदार है और हम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप मोदी दोस्ती इस डील की रीढ़ है। दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ वर्षों में बनी व्यक्तिगत समझ ने ही इस 500 अरब डॉलर की डील की नींव रखी।
50% से 18% तक: टैरिफ में ऐतिहासिक गिरावट
कुछ महीने पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। रूसी तेल की खरीद और जियो-पॉलिटिकल तनावों के कारण भारत पर अमेरिकी टैरिफ 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार लगभग बंद होता दिख रहा था।
लेकिन अब तस्वीर पलट चुकी है।
नई भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत:
- भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ घटाकर 18%
- टेक्सटाइल, आईटी सर्विसेज, जेम्स-ज्वेलरी को सीधा फायदा
- MSME सेक्टर को अमेरिकी बाजार में नई सांस
एक वरिष्ठ ट्रेड एक्सपर्ट के मुताबिक, “यह सिर्फ राहत नहीं, बल्कि भारत के निर्यात सेक्टर के लिए लाइफलाइन है।”
500 अरब डॉलर की डील: सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीति भी
इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण है 500 अरब डॉलर की डील, जो अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। इसके तहत भारत:
- अमेरिका से LNG, कच्चा तेल और कोयला खरीदेगा
- अमेरिकी टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश बढ़ाएगा
- कृषि और रक्षा सहयोग को विस्तार देगा
वहीं अमेरिका को फायदा होगा एक विशाल और स्थिर बाजार का, जहां उसकी ऊर्जा और तकनीक को लंबे समय तक खरीदार मिलते रहेंगे।
रूस और चीन क्यों परेशान हैं?
इस डील ने सबसे ज्यादा बेचैनी रूस और चीन में पैदा की है।
रूस के लिए यह झटका इसलिए है क्योंकि भारत उसके तेल का बड़ा खरीदार रहा है।
वहीं चीन को डर है कि अब अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान उसकी जगह ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। चीन के मुकाबले भारत को अमेरिकी बाजार में अब लागत और भरोसे — दोनों का फायदा मिलेगा।
भारतीय बाजार में दिखा तुरंत असर
डील की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली।
- IT सेक्टर के शेयरों में 5–7% उछाल
- टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट कंपनियों में खरीदारी
- रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत
विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह समझौता ज़मीनी स्तर पर लागू होता है, तो अगले दो वर्षों में भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर छू सकता है।
रोजगार और ‘मेक इन इंडिया’ को नई रफ्तार
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस भारत-अमेरिका ट्रेड डील से:
- लाखों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं
- ‘मेक इन इंडिया’ को ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलेगा
- स्टार्टअप और MSME को अमेरिकी सप्लाई चेन में एंट्री
खास बात यह है कि यह डील सिर्फ बड़े कॉरपोरेट्स तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटे उद्योगों को भी फायदा पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
विपक्ष और आलोचकों के सवाल
हालांकि इस ऐलान के बाद सवाल भी उठ रहे हैं।
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिकी ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष ने भी पूछा है कि क्या भारत पर टैरिफ कटौती के बदले भारत ने बहुत ज्यादा रियायतें दे दी हैं?
सरकार का जवाब है — “यह सौदा भारत के दीर्घकालिक हित में है।”
ट्रंप का चुनावी दांव?
अमेरिका में राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि ट्रंप इस डील को आगामी चुनावों में अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के साथ मजबूत संबंध दिखाकर वे खुद को “ग्लोबल डील-मेकर” के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजर इस पर है कि यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कागजों से जमीन पर कितनी तेजी से उतरता है।
अगले कुछ महीनों में:
- आधिकारिक MoU साइन होने की संभावना
- सेक्टर-वाइज टैरिफ लिस्ट जारी होगी
- निवेश रोडमैप सार्वजनिक किया जाएगा
निष्कर्ष
फरवरी 2026 की यह भारत-अमेरिका ट्रेड डील केवल आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत है। ट्रंप मोदी दोस्ती, 18 प्रतिशत टैरिफ, और 500 अरब डॉलर की डील ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है।
दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या यह समझौता इतिहास में एक नए युग की शुरुआत साबित होगा — या फिर यह भी कूटनीति की किताब का एक और अध्याय बनकर रह जाएगा।
