दुनिया

भारत-यूरोप की इस डील से हिल गया व्हाइट हाउस, ट्रंप सरकार का बड़ा एक्शन शुरू!

वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बिसात पर इस वक्त एक बड़ा खेल चल रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाली ऐतिहासिक व्यापारिक डील ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ मंत्री को खुलेआम यूरोप पर हमला बोलना पड़ा। अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है—
क्या अमेरिका का एकछत्र दबदबा अब टूटने वाला है?

क्या है पूरा मामला?

भारत और यूरोपीय संघ पिछले काफी समय से एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। यह डील अगर फाइनल होती है, तो भारत को यूरोप के विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी और यूरोप को एशिया में एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार।

लेकिन जैसे ही इस डील के फाइनल होने की खबरें तेज हुईं, वॉशिंगटन में बेचैनी साफ नजर आने लगी।

ट्रंप प्रशासन की ‘खुली चेतावनी’

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इस समझौते पर कड़ा एतराज जताया है। ट्रंप सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री ने यूरोप को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा—

“यूरोप को अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना चाहिए।”

अमेरिका को डर है कि भारत–EU डील से अमेरिकी कंपनियों और व्यापारिक हितों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रतिक्रिया ट्रंप की ‘America First’ नीति का नतीजा है, जिसमें अमेरिका नहीं चाहता कि कोई बड़ा वैश्विक गठबंधन उसके बिना मजबूत हो।

दुनिया क्यों है हैरान?

दुनिया इस बात से चौंक गई है कि अमेरिका ने अपने पुराने सहयोगी यूरोप के खिलाफ इतना आक्रामक रुख अपनाया है।

राजनयिक जानकारों की मानें तो:

  • भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत अमेरिका को असहज कर रही है
  • ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है
  • भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार बन चुका है

भारत का साफ संदेश

भारत ने बेहद संतुलित लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने व्यापारिक और राष्ट्रीय हित किसी बाहरी दबाव में तय नहीं करेगा।

यूरोप की मजबूरी

रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप को:

  • एक स्थिर और भरोसेमंद बाजार चाहिए
  • ऊर्जा और व्यापार के नए विकल्प चाहिए

और यह सब उसे भारत में नजर आ रहा है।

क्या सच में खत्म हो रही है अमेरिका की ‘दादागिरी’?

सालों तक वैश्विक व्यापार के नियम अमेरिका तय करता रहा। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। भारत जैसे उभरते देश और यूरोप जैसे पुराने पावर ब्लॉक मिलकर नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रख रहे हैं।

अगर भारत–EU डील सफल होती है, तो यह संकेत होगा कि:

  • दुनिया अब बहुध्रुवीय (Multipolar World) बन चुकी है
  • हर फैसले के लिए वॉशिंगटन की मंजूरी जरूरी नहीं रही

आगे क्या?

आने वाले दिनों में भारत और EU के बीच अंतिम दौर की बातचीत होनी है। अगर अमेरिका का दबाव नाकाम रहता है, तो:

  • यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत होगी
  • और दुनिया को साफ संदेश मिलेगा कि वैश्विक शक्ति संतुलन बदल चुका है

अब सवाल सिर्फ एक है—

क्या अमेरिका इस बदलाव को स्वीकार करेगा या टकराव और बढ़ेगा?
इसका जवाब आने वाले हफ्तों में मिल जाएगा।