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NASA ने अंतरिक्ष में वो कर दिखाया जो आज तक नामुमकिन था!

चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर! NASA की ऐतिहासिक घोषणा, अब कभी नहीं होगी ऊर्जा की कमी

इंसान के अंतरिक्ष सपनों को नई रफ्तार देते हुए NASA ने चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर तैनात करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह कदम न सिर्फ चांद पर स्थायी मानव बेस बनाने की दिशा में क्रांतिकारी है, बल्कि मंगल मिशन के रास्ते भी खोल देगा।

NASA, US Department of Energy के साथ मिलकर 2030 तक चंद्र सतह और कक्षा में फिशन सर्फेस पावर सिस्टम लगाने की तैयारी में है—जो सोलर एनर्जी की सीमाओं को पूरी तरह तोड़ देगा।

जहां सूरज फेल, वहां परमाणु ताकत

चंद्रमा पर 14 दिन की लंबी रात होती है, जब सूरज की रोशनी पूरी तरह गायब रहती है और सोलर पैनल बेकार हो जाते हैं। NASA का यह न्यूक्लियर रिएक्टर इस चुनौती का जवाब है—

  • 40 किलोवाट पावर क्षमता
  • 14 दिन की चंद्र रात्रि में भी लगातार बिजली
  • पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम, बिना इंसानी दखल के

यानी अब चांद पर रहने, रिसर्च करने और मशीनें चलाने के लिए ऊर्जा की चिंता खत्म।

राजनीति से टेक्नोलॉजी तक—मिली रफ्तार

इस महत्वाकांक्षी योजना को ट्रंप प्रशासन की ‘America First Space Policy’ से बड़ा बूस्ट मिला। अमेरिका अंतरिक्ष में लीडरशिप बरकरार रखने के लिए अब न्यूक्लियर एनर्जी को स्पेस मिशन का आधार बना रहा है।

भविष्य के दरवाजे खुल गए

NASA के लिए यह सिर्फ शुरुआत है—

  • Carruthers Geocorona Observatory का L1 ऑर्बिट में सफल लॉन्च
  • Artemis II मिशन अप्रैल 2026 में चंद्र परिक्रमा करेगा
  • Roman Space Telescope 2026 के अंत तक डार्क मैटर की खोज शुरू करेगा

इन सबका अंतिम लक्ष्य साफ है—

  • चंद्रमा पर न्यूक्लियर बेस
  • मंगल पर मानव कॉलोनी का सपना

क्या यही भविष्य है?

जहां कभी चांद सिर्फ सपनों और कविताओं का हिस्सा था, अब वहां परमाणु ऊर्जा से चलने वाला इंसानी ठिकाना बनने जा रहा है। NASA की यह घोषणा साबित करती है कि अंतरिक्ष अब साइंस फिक्शन नहीं, हकीकत बन चुका है।