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ईरान के बाद अब इस देश को ट्रंप की वॉर्निंग, बोले- ‘समय रहते डील कर लो’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देने के बाद अब क्यूबा के खिलाफ तेवर और कड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने क्यूबा को आर्थिक चोकहोल्ड की धमकी देते हुए वेनेजुएला से आने वाले तेल और पैसों की आपूर्ति पूरी तरह रोकने का ऐलान किया है। ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “क्यूबा को अब तेल या पैसा नहीं मिलेगा—जीरो! समय रहते डील कर लो, वरना बहुत देर हो जाएगी।” इस बयान ने कैरेबियन राजनीति में हलचल मचा दी है।

वेनेजुएला कनेक्शन: संकट की जड़

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि 3 जनवरी को वेनेजुएला में किए गए सैन्य ऑपरेशन के बाद निकोलस मादुरो के नेटवर्क पर बड़ा वार हुआ, जिससे क्यूबा की ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे क्यूबा का लगभग आधा तेल भंडार सूख गया। जवाब में हवाना ने अमेरिका को “क्रिमिनल हेजेमन” करार दिया। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कानेल ने सख्त लहजे में कहा, “कोई हमें निर्देश नहीं दे सकता, हम आखिरी बूंद तक लड़ेंगे।”

बताया जा रहा है कि हालिया घटनाओं में 32 क्यूबाई सैनिकों के मारे जाने की खबरों ने हालात और भड़का दिए हैं।

पहले से संकट में क्यूबा, अब बढ़ी मुश्किल

क्यूबा पहले ही ब्लैकआउट, ईंधन की कमी और भोजन संकट से जूझ रहा है। ऐसे में तेल और फंडिंग पर ब्रेक लगने से हालात और गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने अपने खास अंदाज़ में एक बार फिर मजाकिया टिप्पणी करते हुए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो को क्यूबा का राष्ट्रपति बनाने का सुझाव दोहराया—“Sounds good to me!” वहीं क्यूबा ने ईंधन आयात के अपने अधिकार पर जोर दिया है और दबाव में झुकने से इनकार किया है।

पलायन और अलगाव का खतरा

आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच करीब 14 लाख क्यूबाई देश छोड़ चुके हैं। जानकारों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचा, तो क्यूबा का अंतरराष्ट्रीय अलगाव और तेज हो सकता है—जिसका असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा।

अब सवाल यह है कि क्या क्यूबा दबाव में आकर डील की राह चुनेगा या फिर सख्त रुख पर अड़ा रहेगा? ट्रंप की चेतावनी के बाद कैरेबियन में भू-राजनीतिक तापमान साफ तौर पर बढ़ता दिख रहा है।